Prayagraj : एनआईए के रडार पर अर्बन नक्सल मूवमेंट से जुड़े स्लीपिंग सेल, दोबारा आ सकती है टीम
एनआईए की टीम पिछले साल जनवरी से अर्बन नक्सल मूवमेंट से जुड़े लाेगाें की धरपकड़ में जुटी है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ही टीम ने प्रयागराज समेत अलग-अलग शहरों में छापा मारा। शुक्रवार को दोबारा शहर में आकर प्रतियोगी छात्र से पूछताछ की। कहा जा रहा है कि एनआईए जांच का दायरा और बढ़ाएगी।
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अर्बन नक्सल मूवमेंट से जुड़े प्रतिबंधित संगठन को फिर से खड़ा करने की कोशिश में जुटे स्लीपिंग सेल एनआईए के रडार पर हैं। प्रयागराज में ऐसे कुछ स्लीपिंग सेल के होने की जानकारी जांच एजेंसी तक पहुंची है। एनआईए की टीम दोबारा शहर में आकर अपनी जांच को आगे बढ़ा सकती है।
एनआईए की टीम पिछले साल जनवरी से अर्बन नक्सल मूवमेंट से जुड़े लाेगाें की धरपकड़ में जुटी है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ही टीम ने प्रयागराज समेत अलग-अलग शहरों में छापा मारा। शुक्रवार को दोबारा शहर में आकर प्रतियोगी छात्र से पूछताछ की। कहा जा रहा है कि एनआईए जांच का दायरा और बढ़ाएगी। इसके तहत चिह्नित साहित्य के प्रकाशन के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े लोगों से जल्द ही पूछताछ की जा सकती है।
साल भर के भीतर ही एनआईए की टीम तीन बार प्रयागराज में छापा मार चुकी है। कुछ दिनों पहले ही जांच एजेंसी की एक टीम ने लालापुर में भी छापा मारा था। जानकारों का कहना है कि प्रयागराज नक्सल मूवमेंट को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से समर्थन देने वालों का प्रमुख केंद्र रहा है। यही वजह है कि एनआईए की ओर से दर्ज केस की जांच के क्रम में प्रयागराज का नाम उभरकर आया है।
एफआईआर में नामजद लोगों में सबसे ज्यादा संख्या मूल रूप से प्रयागराज में रहने वालों की है। इस संबंध में स्थानीय पुलिस अफसरों ने कुछ भी कहने से इन्कार किया। एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एनआईए की कार्रवाई में स्थानीय पुलिस की भूमिका केवल बाहरी सपोर्ट तक सीमित रहती है। इसके अलावा उनकी ओर से अन्य कोई भी जानकारी साझा नहीं की जाती। यहां तक कि सपोर्ट के लिए जो पुलिस टीम ले जाई जाती है, उसे भी आखिरी मौके पर ही गंतव्य स्थल की जानकारी दी जाती है।
मैगजीन के साथ ही अखबार की प्रति भी ले गई एनआईए
शिवकुटी के गोविंदपुर में छात्र से पूछताछ करने पहुंची एनआईए छात्र के घर से तलाशी के दौरान मिली मैगजीन के साथ ही एक अखबार की प्रति भी ले गई। इसके साथ ही जो तीसरा सामान जब्त कर ले जाया गया वह परिचर्चा संबंधी एक पम्फलेट है।
एनआईए ने अपनी पूरी कार्रवाई को कैमरे में रिकॉर्ड किया। छात्र देवेंद्र सिंह से पूछताछ के साथ ही उसके कमरे की तलाशी की कार्रवाई की भी वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। यह पूरी कार्रवाई दो स्वतंत्र साक्षियों की मौजूदगी में संपन्न की गई। साथ ही कार्रवाई का संक्षिप्त विवरण भी लिखापढ़ी में छात्र को सौंपा गया। एनआईए के रिकॉर्ड के मुताबिक, यह कार्रवाई शुक्रवार भोर में 5:30 बजे से सुबह 9:40 बजे तक की गई।
यानी छात्र के कमरे में कुल 4:10 घंटे रहकर एनआईए के अफसर जांच पड़ताल में जुटे रहे। पूछताछ के बाद तलाशी ली गई जिसमें कुल तीन दस्तावेज सीज किए गए। इनमें आठ पेज का ‘मशाल’ समाचार पत्र का मई-जून में प्रकाशित संस्करण शामिल है। इसके अलावा 40 पेज की ‘दस्तक’ पत्रिका के मई-जून संस्करण को भी जब्त किया गया।
तीसरा दस्तावेज जिसे एनआईए ने जब्त किया, वह एक पम्फलेट था जिसका शीर्षक परिचर्चा ‘वर्तमान भारतीय अर्थव्यवस्था’ है। एनआईए ने लिखापढ़ी में छात्र को यह भी बताया कि कार्रवाई के दौरान प्रथमदृष्टया दोषारोपण की प्रकृति वाली कोई भी चीज बरामद नहीं हुई। हालांकि, गहनता से परीक्षण के लिए उपरोक्त दस्तावेज सीज किए गए हैं।