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घर बैठूंगा, नहीं करूंगा चुनाव प्रचार
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 28 Jan 2017 02:45 AM IST
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पहलवानों को हाथ मिलवाते इलाहाबाद सांसद श्यामाचरण गुप्त
- फोटो : अमर उजाला
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पत्नी जमुनोत्री गुप्ता और बेटे विदुप अग्रहरि को टिकट न दिए जाने से नाराज इलाहाबाद के भाजपा सांसद श्यामा चरण गुप्ता ने पार्टी के लिए चुनाव प्रचार न करने की घोषणा की है। तर्क दिया कि जब पार्टी अन्य सांसदों के रिश्तेदारों या परिजनों को टिकट दे सकती है तो सिर्फ उन्हीं की ही क्यों उपेक्षा की गई। आखिर ऐसा क्या गुनाह है कि जब दो में से एक सीट पर भी मेरी पसंद का उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया गया। कहा कि चुनाव प्रचार करने से बेहतर है कि मैं घर पर ही बैठूं।
सांसद श्यामा चरण ने विधानसभा चुनाव के लिए इलाहाबाद दक्षिण से अपनी पत्नी जमुनोत्री गुप्ता और मानिकपुर विधानसभा सीट से बेटे विदुप अग्रहरि के लिए टिकट की डिमांड की थी, लेकिन इन दोनों ही सीटों पर पार्टी की ओर से दूसरे प्रत्याशी उतार दिए गए। पार्टी के इस निर्णय के बाद से वे काफी खफा भी है।
उन्होंने कहा कि एक सांसद होने के नाते पार्टी को चाहिए था कि वह कम से कम इलाहाबाद की विधानसभा सीटों के टिकट वितरण को लेकर उनकी राय लें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कहा कि मेरी उपेक्षा हुई है। श्यामा चरण के अनुसार जब पार्टी नेतृत्व 15 से ज्यादा सांसदों के परिजनों या रिश्तेदारों को टिकट दे सकता है तो मेरे आग्रह पर भी कम से कम जमुनोत्री या विदुप में से किसी एक को टिकट दी जानी चाहिए थी। अपनी उपेक्षा से नाराज श्यामाचरण ने राजनीति से संन्यास लेने की भी बात कही। कहा कि टिकट वितरण से मेरा बेटा विदुप भी काफी हताश है। वह एक दो दिन में कोई बड़ा निर्णय ले सकता है। बेटा जो भी फैसला लेगा में उसके साथ रहूंगा। मेरे लिए पहले मेरा परिवार है बाद में पार्टी।
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सांसद श्यामा चरण ने विधानसभा चुनाव के लिए इलाहाबाद दक्षिण से अपनी पत्नी जमुनोत्री गुप्ता और मानिकपुर विधानसभा सीट से बेटे विदुप अग्रहरि के लिए टिकट की डिमांड की थी, लेकिन इन दोनों ही सीटों पर पार्टी की ओर से दूसरे प्रत्याशी उतार दिए गए। पार्टी के इस निर्णय के बाद से वे काफी खफा भी है।
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उन्होंने कहा कि एक सांसद होने के नाते पार्टी को चाहिए था कि वह कम से कम इलाहाबाद की विधानसभा सीटों के टिकट वितरण को लेकर उनकी राय लें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कहा कि मेरी उपेक्षा हुई है। श्यामा चरण के अनुसार जब पार्टी नेतृत्व 15 से ज्यादा सांसदों के परिजनों या रिश्तेदारों को टिकट दे सकता है तो मेरे आग्रह पर भी कम से कम जमुनोत्री या विदुप में से किसी एक को टिकट दी जानी चाहिए थी। अपनी उपेक्षा से नाराज श्यामाचरण ने राजनीति से संन्यास लेने की भी बात कही। कहा कि टिकट वितरण से मेरा बेटा विदुप भी काफी हताश है। वह एक दो दिन में कोई बड़ा निर्णय ले सकता है। बेटा जो भी फैसला लेगा में उसके साथ रहूंगा। मेरे लिए पहले मेरा परिवार है बाद में पार्टी।
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