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बिना लिखित परीक्षा कांस्टेबल भर्ती पर निर्णय सुरक्षित
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 21 Jan 2017 01:32 AM IST
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बिना लिखित परीक्षा कराए पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती के मामले में हाईकोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। मात्र शारीरिक दक्षता और शैक्षणिक प्राप्तांक के आधार पर चयन करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा पुलिस भर्ती नियमावली में किए गए संशोधन को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार से भर्ती नियमावली से संबंधित सभी दस्तावेज 24 जनवरी तक पेश करने के लिए कहा है।
रणविजय सिंह सहित दर्जनों अन्य याचिकाओं पर न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति अभय कुमार की पीठ ने सुनवाई की। याचिका पर अधिवक्ता सीमांत सिंह ने दलील दी कि पुलिस भर्ती बोर्ड सहित प्रदेश में जितने भर्ती बोर्ड हैं सभी लिखित परीक्षा के द्वारा ही चयन करते हैं। योग्यतम अभ्यर्थी के चयन हेतु यही प्रक्रिया उचित है। इसके विपरीत प्रदेश सरकार ने कांस्टेबलों की भर्ती बिना लिखित परीक्षा कराए मात्र शैक्षणिक प्राप्तांक और शारीरिक दक्षता परीक्षा के आधार पर कराने के लिए 2015 की नियमावली में संशोधन कर दिया है। पुलिस कांस्टेबलों को शारीरिक श्रम के साथ बौद्धिक कार्य भी करने होते हैं। इसलिए लिखित परीक्षा कराना आवश्यक है।
बिना लिखित परीक्षा के चयन में मनमाने तरीके से भर्ती किए जाने की आशंका है। याचिका पर अधिवक्ता विजय गौतम, वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे और प्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने भी बहस की।
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रणविजय सिंह सहित दर्जनों अन्य याचिकाओं पर न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति अभय कुमार की पीठ ने सुनवाई की। याचिका पर अधिवक्ता सीमांत सिंह ने दलील दी कि पुलिस भर्ती बोर्ड सहित प्रदेश में जितने भर्ती बोर्ड हैं सभी लिखित परीक्षा के द्वारा ही चयन करते हैं। योग्यतम अभ्यर्थी के चयन हेतु यही प्रक्रिया उचित है। इसके विपरीत प्रदेश सरकार ने कांस्टेबलों की भर्ती बिना लिखित परीक्षा कराए मात्र शैक्षणिक प्राप्तांक और शारीरिक दक्षता परीक्षा के आधार पर कराने के लिए 2015 की नियमावली में संशोधन कर दिया है। पुलिस कांस्टेबलों को शारीरिक श्रम के साथ बौद्धिक कार्य भी करने होते हैं। इसलिए लिखित परीक्षा कराना आवश्यक है।
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बिना लिखित परीक्षा के चयन में मनमाने तरीके से भर्ती किए जाने की आशंका है। याचिका पर अधिवक्ता विजय गौतम, वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे और प्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने भी बहस की।
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