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Prayagraj News: दूरबीन विधि से साइनस की सर्जरी सुरक्षित और आसान
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प्रयागराज। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, एसोसिएशन ऑफ ऑटोलारिंगोलॉजिस्ट्स ऑफ इंडिया की प्रयागराज शाखा और यूनाइटेड इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की तरफ से संयुक्त रूप से आयोजित 40वें वार्षिक अधिवेशन यूपीएओआईकॉन-2023 की शुरूआत शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने की।
वार्षिक अधिवेशन में प्रदेश के साथ ही देश के वरिष्ठ ईएनटी सर्जन, शोध और मेडिकल के छात्र शामिल हुए। कार्यशाला की अध्यक्षता डीन यूनाइटेड इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज डॉ. मंगल सिंह और ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रभात श्रीवास्तव ने की।
अधिवेशन के दूसरे दिन वरिष्ठ चिकित्सकों ने कान की इंडोस्कोपिक टिमपनोप्लास्टी (कान के पर्दे का दूरबीन से इलाज), मैस्टॉयड (कान की हड्डी गलने की बीमारी की सर्जरी), स्टेपडोटोमी सर्जरी, नाक में दूरबीन विधि से साइनस की सर्जरी, एंजियोफाइब्रोमा (नाक की गठान की सर्जरी), डेक्रियोसिस्टोराइनोस्टमी (आंसू की थैली का दूरबीन से ऑपरेशन), लार की ग्रंथि की पथरी की दूरबीन से सर्जरी और गले में ट्रॉन्सिल्स की सर्जरी के साथ ही मरीजों की अन्य जटिल सर्जरी निशुल्क कर चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया।
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इन सर्जरी को करने वालों में जयपुर से आए वरिष्ठ सर्जन डॉ. सतीश जैन, बंगलूरू के डॉ. विनय होनूरप्पा, हरियाणा के डॉ. संजय खन्ना, मेदांता गुरुग्राम के डॉ. केके हांडा, दिल्ली के डॉ. वरुण राय और पटना के डॉ. संजीव कुमार शामिल रहे। अधिवेशन में ईएनटी विशेषज्ञों ने इन ऑपरेशनों के समय से होने पर जोर दिया। कहा कि अगर बिमारी ने जटिल रूप ले लिया तो कई बार यह जानलेवा भी साबित हो जाती है।
साइनस की बीमारी पर चर्चा करते हुए कहा कि अगर समय पर इसका इलाज नहीं हुआ तो यह भी जटिल रूप ले सकती है। नाक से बार बार खून आना, नाक में मस्से का होना एंजियोफाइब्रोमा जैसी गंभीर बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि समय पर जांच और इलाज हो।
कार्यशाला में बताया गया कि नई तकनीक जैसे लेजर, माइक्रोड्राइडर, कोबलेशन आदि से सर्जरी में रक्त लगभग नहीं बहता है और समय भी कम लगता है। कार्यशाला में डॉ. एलएस ओझा, डॉ. मंगल सिंह, डॉ. मनीका सलूजा, डॉ. अरविंद श्रीवास्तव, डॉ. आशुतोष राय, डॉ. शशांक ओझा, डॉ. कार्तिकेय मिश्रा मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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वार्षिक अधिवेशन में प्रदेश के साथ ही देश के वरिष्ठ ईएनटी सर्जन, शोध और मेडिकल के छात्र शामिल हुए। कार्यशाला की अध्यक्षता डीन यूनाइटेड इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज डॉ. मंगल सिंह और ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रभात श्रीवास्तव ने की।
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अधिवेशन के दूसरे दिन वरिष्ठ चिकित्सकों ने कान की इंडोस्कोपिक टिमपनोप्लास्टी (कान के पर्दे का दूरबीन से इलाज), मैस्टॉयड (कान की हड्डी गलने की बीमारी की सर्जरी), स्टेपडोटोमी सर्जरी, नाक में दूरबीन विधि से साइनस की सर्जरी, एंजियोफाइब्रोमा (नाक की गठान की सर्जरी), डेक्रियोसिस्टोराइनोस्टमी (आंसू की थैली का दूरबीन से ऑपरेशन), लार की ग्रंथि की पथरी की दूरबीन से सर्जरी और गले में ट्रॉन्सिल्स की सर्जरी के साथ ही मरीजों की अन्य जटिल सर्जरी निशुल्क कर चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया।
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इन सर्जरी को करने वालों में जयपुर से आए वरिष्ठ सर्जन डॉ. सतीश जैन, बंगलूरू के डॉ. विनय होनूरप्पा, हरियाणा के डॉ. संजय खन्ना, मेदांता गुरुग्राम के डॉ. केके हांडा, दिल्ली के डॉ. वरुण राय और पटना के डॉ. संजीव कुमार शामिल रहे। अधिवेशन में ईएनटी विशेषज्ञों ने इन ऑपरेशनों के समय से होने पर जोर दिया। कहा कि अगर बिमारी ने जटिल रूप ले लिया तो कई बार यह जानलेवा भी साबित हो जाती है।
साइनस की बीमारी पर चर्चा करते हुए कहा कि अगर समय पर इसका इलाज नहीं हुआ तो यह भी जटिल रूप ले सकती है। नाक से बार बार खून आना, नाक में मस्से का होना एंजियोफाइब्रोमा जैसी गंभीर बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि समय पर जांच और इलाज हो।
कार्यशाला में बताया गया कि नई तकनीक जैसे लेजर, माइक्रोड्राइडर, कोबलेशन आदि से सर्जरी में रक्त लगभग नहीं बहता है और समय भी कम लगता है। कार्यशाला में डॉ. एलएस ओझा, डॉ. मंगल सिंह, डॉ. मनीका सलूजा, डॉ. अरविंद श्रीवास्तव, डॉ. आशुतोष राय, डॉ. शशांक ओझा, डॉ. कार्तिकेय मिश्रा मुख्य रूप से मौजूद रहे।