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परिवार की परिभाषा में भाई-बहन, विधवा मां भी
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 11 Feb 2015 11:50 PM IST
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मृतक सरकारी कर्मचारी के आश्रितों की श्रेणी में उसके अविवाहित भाई-बहन और विधवा मां भी आएगी। हाईकोर्ट ने मृतक आश्रित अनुकंपा नियुक्ति 1974 की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्ष 2001 में हुए संशोधन के बाद ‘परिवार’ का दायरा बढ़ा दिया गया है। इसके अनुसार यदि मृत कर्मचारी अविवाहित था और भाई-बहन तथा विधवा मां उस पर आश्रित थे तो वह परिवार की परिभाषा में आते हैं। वह अनुकंपा आधार पर नियुक्ति पाने के हकदार हैं।
मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार की विशेष अपील को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी है। यह प्रकरण वर्ष 2006 में नियुक्त पुलिस कांस्टेबल के भाई विनय यादव के मामले में सामने आया। वर्ष 2006 में प्रदेश सरकार ने 18700 पुलिस सिपाहियों की भर्ती की। बाद में इस भर्ती धांधली के आधार पर 2007 में बसपा सरकार ने रद कर दिया। अभ्यर्थी मामले को लेकर हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट का फैसला आने से पूर्व ही विनय यादव के भाई की एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई। वह अविवाहित था। विनय यादव ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की मांग की मगर सरकार ने उसका प्रार्थनापत्र रद कर दिया।
प्रदेश सरकार ने भाई को मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति का हकदार नहीं माना। दलील दी कि मृतक आश्रित नियमावली 2011 में संशोधित की गई उसके बाद भाई को परिवार का हिस्सा माना गया। खंडपीठ ने सरकार की दलील को नकारते हुए साफ किया कि वर्ष 2001 के संशोधन द्वारा ‘परिवार’ का दायरा बढ़ाया गया।
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मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार की विशेष अपील को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी है। यह प्रकरण वर्ष 2006 में नियुक्त पुलिस कांस्टेबल के भाई विनय यादव के मामले में सामने आया। वर्ष 2006 में प्रदेश सरकार ने 18700 पुलिस सिपाहियों की भर्ती की। बाद में इस भर्ती धांधली के आधार पर 2007 में बसपा सरकार ने रद कर दिया। अभ्यर्थी मामले को लेकर हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट का फैसला आने से पूर्व ही विनय यादव के भाई की एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई। वह अविवाहित था। विनय यादव ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की मांग की मगर सरकार ने उसका प्रार्थनापत्र रद कर दिया।
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प्रदेश सरकार ने भाई को मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति का हकदार नहीं माना। दलील दी कि मृतक आश्रित नियमावली 2011 में संशोधित की गई उसके बाद भाई को परिवार का हिस्सा माना गया। खंडपीठ ने सरकार की दलील को नकारते हुए साफ किया कि वर्ष 2001 के संशोधन द्वारा ‘परिवार’ का दायरा बढ़ाया गया।
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