शुआट्स विश्वविद्यालय : सरकारी अनुदान से मनमर्जी भुगतान, यात्रा पर ही खर्च कर दिए 10 लाख
यह तथ्य प्रकाश में आया कि 2010-11 से 2017-18 तक स्थानीय व वाह्य यात्राओं के लिए निजी वाहन उपलब्ध कराने वाली फर्म को 10.04 लाख रुपये का भुगतान सरकारी अनुदान से किया गया जिसमें घोर अनियमितताएं पाईं गईं। पहले तो जिस फर्म को भुगतान किया गया, उसकी वैद्यानिकता की पुष्टि परिवहन या आयकर विभाग से नहीं कराई गई।
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शुआट्स में 5.56 करोड़ के गबन के मामले में विवेचना के दौरान पुलिस को अहम बातें पता चलीं। सरकारी अनुदान का मनमर्जी भुगतान किया गया। यहां तक कि यात्रा के मद में ही 10 लाख रुपये का अनियमित भुगतान कर दिया। स्पेशल ऑडिट में लगाए गए गड़बड़ी के आरोप सही मिलने पर ही वीसी समेत 10 के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई।
निदेशक, स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग उप्र की ओर से कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के आदेश पर किए स्पेशल ऑडिट में व्यापक तौर पर गड़बड़ियां पाई गईं थीं। इस दौरान विभिन्न मदों में सरकारी अनुदान के 5.56 करोड़ रुपये के गबन व अनियमित भुगतान का मामला सामने आया था। एक गड़बड़ी यात्रा व्यय मद में किए गए भुगतान से भी संबंधित था।
यह तथ्य प्रकाश में आया कि 2010-11 से 2017-18 तक स्थानीय व वाह्य यात्राओं के लिए निजी वाहन उपलब्ध कराने वाली फर्म को 10.04 लाख रुपये का भुगतान सरकारी अनुदान से किया गया जिसमें घोर अनियमितताएं पाईं गईं। पहले तो जिस फर्म को भुगतान किया गया, उसकी वैद्यानिकता की पुष्टि परिवहन या आयकर विभाग से नहीं कराई गई। फर्म से अनुबंध भी नहीं किया गया था जबकि शासनादेश के मुताबिक यह अनिवार्य है।
136 यात्राओं पर मनमानी पैसा किया गया खर्च
इसके अलावा नियमों के मुताबिक, जो कर्मचारी निजी टैक्सी से यात्रा करने को अधिकृत नहीं थे, उन्हें भी इसकी अनुमति दी गई। इस तरह की 136 यात्राओं का ब्योरा मिला। उन्हें अधिक से अधिक एसी बस से जाने का प्रावधान था। यह भी पाया गया कि अगर कर्मचारी नियमानुसार एसी बस से यात्रा करते तो कुल 136 यात्राओं पर अधिकतम 800 रुपये किराये के हिसाब से 1.08 लाख रुपये का खर्च आता। जबकि निजी टैक्सी से की गई उनकी यात्रा के लिए 7.36 लाख रुपये का भुगतान हुआ। ऐसे में करीब 6.27 लाख रुपये के सरकारी अनुदान का बेजा खर्च किया गया।
आईसीएआर की ग्रांट का भी दुरुपयोग
सूत्रों का कहना है कि शुआट्स में सरकारी अनुदान के अनियमित व्यय का खेल सालों से चल रहा था। 2014-15 मेें हुए जनरल ऑडिट में भी तमाम गड़बड़ी सामने आई थी। इसमें से एक इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) की ओर से दिए गए विकास अनुदान की राशि के अनियमित व्यय से भी संबंधित था। जांच एजेंसी ने पाया था कि आईसीएआर की अनुदान राशि से रायबरेली स्थित एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में निर्माण कार्य के लिए 19.61 लाख का भुगतान किया गया। यह नियमत: गलत था क्योंकि अनुदान संस्थान के नैनी प्रयागराज स्थित संस्थान के नाम से जारी किया गया था।
जेल में बंद डीन का आज हो सकता है बयान
5.56 करोड़ के गबन के एक आरोपी डीन डॉ. इम्तियाज का बयान नैनी पुलिस आज ले सकती है। दरअसल कोर्ट से इसके लिए अनुमति मिल गई है। नैनी पुलिस फतेहपुर जेल में जाकर उसका बयान दर्ज करेगी। इसके बाद उसके भी खिलाफ चार्जशीट लगाई जा सकती है।