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श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामला : बिना वकालतनामा बहस करने पर मंदिर पक्ष ने जताया विरोध

Tue, 21 May 2024 02:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 21 May 2024 02:36 PM IST
सार

श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट और संस्थान के अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी ने दलील प्रस्तुत करते हुए कहा, इलाहाबाद हाईकोर्ट नियमावली 1952 के प्रावधानों के विरुद्ध वकालतनामा के बिना मुस्लिम पक्ष की अधिवक्ता तसनीम अहमदी तथा महमूद प्राचा अदालत को गुमराह करके बहस कर रहे हैं।

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Shri Krishna Janmabhoomi case: Temple side protested against arguing without Vakalatnama
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में श्रीकृष्ण जन्मभूमि व शाही ईदगाह विवाद मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को मंदिर पक्ष के अधिवक्ताओं ने बिना वकालतनामा लगाए मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता के बहस करने का विरोध किया। न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की कोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए निर्देश दिया तो मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता ने अविलंब वकालतनामा लगाने की बात कही।

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श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट और संस्थान के अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी ने दलील प्रस्तुत करते हुए कहा, इलाहाबाद हाईकोर्ट नियमावली 1952 के प्रावधानों के विरुद्ध वकालतनामा के बिना मुस्लिम पक्ष की अधिवक्ता तसनीम अहमदी तथा महमूद प्राचा अदालत को गुमराह करके बहस कर रहे हैं।

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इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने भी मुस्लिम पक्ष की ओर से वाद 9 और 16 में वकालतनामा न होने की जानकारी देते हुए अदालत से कार्रवाई के लिए प्रार्थना की। अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ताओं को नियमानुसार मामले में वकालतनामा लगाने की सख्त हिदायत दी। इसपर अहमदी और प्राचा ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि वे नियमों के अनुसार अपना वकालतनामा दाखिल करेंगे।

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वहीं, मंदिर पक्ष के अधिवक्ता सत्यवीर सिंह ने कहा, विवादित ढांचे से संबंधित समझौता पत्र में प्रॉपर्टी के मुख्य मालिक पक्षकार नहीं हैं। जमीन का मालिकाना हक सिर्फ शाश्वत बालकृष्ण (केशव देव) को ही है। उनके हित के विरुद्ध किसी भी प्रकार का समझौता विधिमान्य नहीं है। अन्य दलीलें भी दी गईं।

सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय इलाहाबाद व राजस्थान के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा, इस मामले में वक्फ एक्ट और विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम भी लागू नहीं होता है। वहीं, शाही ईदगाह पक्ष के अधिवक्ता तनवीर अहमद ने कहा, उपासना अधिनियम व वक्फ एक्ट के तहत यह वाद सिविल कोर्ट में नहीं चल सकता है। मामले में लिमिटेशन एक्ट भी प्रभावी है। ऐसे में यह वाद पोषणीय न होने के कारण सुनवाई योग्य नहीं है।

मंगलवार को शूट 5, 6 व 10 सहित अन्य मामलों पर बहस होगी। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष पांडेय, अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह, विनय शर्मा, नसीज्जमां, मार्कंडेय राय, प्रणव ओझा, सिद्धार्थ श्रीवास्तव आदि पक्ष रखने के लिए मौजूद रहे।

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