बालगृह में यौन शोषण मामला : सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश मिश्र को कारण बताओ नोटिस
समाचार पत्रों में 22 सितंबर को खबर छपने के बाद गठित दो अलग-अलग समितियों ने जांच के बाद यौन शोषण के आरोपों को नकार दिया था। खास यह कि जांच कमेटी के सदस्यों ने पीड़ित बालक एवं आरोप लगाने वाली महिला से पूछताछ के बगैर ही संस्था को क्लीन चिट दे दी।
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बालगृह में यौन शोषण तथा अन्य अनियमितता के मामले में महिला कल्याण विभाग की ओर से बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। उनसे रिपोर्ट भेजने में देरी, मानसिक रूप से कमजोर बच्चों के पुनर्वास के लिए पत्र नहीं लिखने, मीडिया में रिपोर्ट देने आदि बिंदुओं पर सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। बालगृह में रहने वाले एक बालक की मां ने 18 अगस्त को सीडब्ल्यूसी के सामने बेटे के साथ यौन शोषण की शिकायत की थी। बालगृह में कई अन्य तरह की अनियमितता की भी शिकायत हुई थी। इस बाबत सीडब्लयूसी की ओर से करीब एक महीने बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी के माध्यम डीएम को रिपोर्ट भेजी गई थी।
समाचार पत्रों में 22 सितंबर को खबर छपने के बाद गठित दो अलग-अलग समितियों ने जांच के बाद यौन शोषण के आरोपों को नकार दिया था। खास यह कि जांच कमेटी के सदस्यों ने पीड़ित बालक एवं आरोप लगाने वाली महिला से पूछताछ के बगैर ही संस्था को क्लीन चिट दे दी। इसी क्रम में जिला प्रोबेशन अधिकारी की ओर से सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। इसमें कहा गया था कि अध्यक्ष मीडिया में रिपोर्ट देकर विभाग की छवि को खराब कर रहे हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने यह सवाल भी उठाया था कि यौन शोषण की रिपोर्ट देने में देरी क्यों हुई। इसके अलावा पीड़ित बालक का मेडिकल क्याें नहीं कराया गया।
जिला प्रोबेशन अधिकारी ने अध्यक्ष की भूमिका को लेकर रिपोर्ट में कई अन्य सवाल भी उठाए थे। इस आधार पर डीएम की ओर से महिला कल्याण विभाग को पत्र लिखा गया था। इसी क्रम में विभाग की ओर से सीडब्ल्यूसी के चेयरमैन को नोटिस जारी कर इन बिंदुओं पर सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।