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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Show cause notice issued to the deceased after imposing a fine of Rs 21 lakh, cancelled by High Court

UP : 21 लाख जुर्माना लगा मृतक को जारी किया कारण बताओ नोटिस, हाईकोर्ट ने किया रद्द

Fri, 25 Apr 2025 06:43 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 25 Apr 2025 06:43 PM IST
सार

जीएसटी विभाग ने मृतक को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 21 लाख का जुर्माना भी लगा दिया। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, मृतक को कारण बताओ नोटिस नहीं जारी किया जा सकता, लिहाजा उस पर लगाया गया जुर्माना अवैध है।

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Show cause notice issued to the deceased after imposing a fine of Rs 21 lakh, cancelled by High Court
अदालत - फोटो : ANI

विस्तार

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जीएसटी विभाग ने मृतक को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 21 लाख का जुर्माना भी लगा दिया। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, मृतक को कारण बताओ नोटिस नहीं जारी किया जा सकता, लिहाजा उस पर लगाया गया जुर्माना अवैध है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जीएसटी बकाये की वसूली मृतक के विधिक प्रतिनिधियों से तभी की जा सकती है, जब मौत के बाद व्यवसाय जारी हो।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति शैलेन्द्र क्षितिज की अदालत ने सेठिया ट्रेडिंग कंपनी के मृतक मालिक अमित सेठिया की पत्नी अलका सेठिया की ओर से दाखिल याचिका स्वीकार करते हुए दिया है। मामला मिर्जापुर का है। मई 2021 में अमित कुमार सेठिया की मौत के बाद जीएसटी विभाग ने उनकी फर्म का पंजीकरण निरस्त कर दिया था। इसके सितंबर 2023 में उनके नाम से कारण बताओ नोटिस जारी किया। जवाब न मिलने पर नवंबर 2023 में उन पर 21,49,585.60 रुपये अर्थदंड लगा वसूली आदेश जारी कर दिया।

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इसके खिलाफ पत्नी अलका ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अधिवक्ता ने दलील दी कि मृतक के विधिक प्रतिनिधियों से वसूली किया जाना अवैधानिक है। मौजूदा मामले में विभाग को पहले से ही मालूम है कि कंपनी के मालिक की मौत हो चुकी है। वहीं, विभाग ने जीएसटी अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि मृतक के विधिक प्रतिनिधियों से जीएसटी बकाये की रकम वसूली जा सकती है।

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कोर्ट ने विभाग की दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अधिनियम के तहत विधिक प्रतिनिधियों से वसूली तभी की जा सकती है जब मृतक का व्यापार लगातार जारी हो। मौजूदा मामले में कंपनी के मालिक की मौत के बाद जीएसटी विभाग ने पंजीकरण खुद ही निरस्त कर दिया था। ऐसे में यह तर्क बेदम है कि विभाग को कंपनी के मालिक की मौत का पता नहीं था। लिहाजा, मृतक के खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस और वसूली आदेश अवैध है।

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