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Mahakumbh : सपने दिखाकर आवंटित की गईं दुकानें, फिर लगा दी बैरिकेडिंग, पूंजी भी नहीं निकल पा रही

Fri, 14 Feb 2025 02:10 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 14 Feb 2025 02:10 PM IST
सार

मेले में दुकानों के आवंटन के नाम पर मेला प्रशासन ने नीलामी कराकर करोड़ों रुपये का राजस्व तो एकत्रित कर लिया, लेकिन आमदनी न हाेने से दुकानदारों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

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Shops were allotted by showing dreams, then barricades were put up, even the capital is not able to come out.
ओडीओपी प्रयागराज। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मेले में दुकानों के आवंटन के नाम पर मेला प्रशासन ने नीलामी कराकर करोड़ों रुपये का राजस्व तो एकत्रित कर लिया, लेकिन आमदनी न हाेने से दुकानदारों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि मेला क्षेत्र में जगह-जगह बैरिकेडिंग की वजह से ही उम्मीद के अनुसार उनका कारोबार नहीं हो सका है। दुकानदारों की मानें तो त्रिवेणी बाजार में महाकुंभ मेला प्रशासन ने तकरीबन 120 दुकानें आवंटित करने की कवायद शुरू की।

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कई बार नीलामी की प्रक्रिया पूर्ण कराई गई। बावजूद इसके तकरीबन 30 दुकानों का आवंटन नहीं हो सका। मेला प्रशासन ने सपना दिखाया कि मेले में करोड़ों की भीड़ आएगी, जिससे उन्हें आमदनी अच्छी होगी। इसके बाद मेला और पुलिस प्रशासन ने जगह-जगह ऐसी बैरिकेडिंग कर दी कि ग्राहक त्रिवेणी बाजार में जितनी संख्या में आने चाहिए, नहीं आ सकें।

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किसी ने आठ तो किसी ने 12 लाख में ली है दुकान

इसका असर यह हुआ कि दुकानदारों का कारोबार चौपट हो गया। मेला समाप्त होने में कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में दुकानदारों को फायदा होना तो दूर, पूंजी लौट पाने के आसार भी नहीं लग रहे हैं। हरिद्वार से आए एक दुकानदार ने बताया कि नीलामी की प्रक्रिया में भाग लेकर उसने दो दुकानें प्राप्त की। एक आठ लाख में दूसरी बारह लाख में, लेकिन ग्राहकों की कमी से पूंजी बर्बाद हो गई है। तकरीबन नौ लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता हैं। सुरेश गुप्ता नामक दुकानदार का कहना है कि 15 लाख में दुकान लिया था, अब पूंजी बर्बाद हो गई है।

घर, मकान बेचकर उधार और कर्ज चुकाना पड़ेगा। एक अन्य दुकानदार ने बताया कि बिटिया की शादी के लिए उसने पैसा रखा था, सोचा मेले में अच्छी खासी आमदनी हो जाएगी, बिटिया की शादी धूमधाम से करूंगा, लेकिन पूंजी लौटने के आसान नजर नहीं आ रहे हैं। उधर, मेलाधिकारी विजय किरण आनंद का कहना है कि मेले में सभी दुकानों का आवंटन मानक के तहत ही किया गया है।

केस एक

कपड़े के कारोबारी नरेश पाल का कहना है कि नीलामी में पांच लाख में दुकान आवंटित कराया। मेला प्रशासन ने दावा किया था कि बहुत सेल होगी, लेकिन हालात विपरीत हैं। दुकान पर सात लोग काम करते हैं। खाना-पीना मजदूरी घर से ही लग रहा है। छह लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा हैं। बिक्री कुछ नहीं हैं। इसके पीछे प्रशासन की बैरिकेडिंग मुख्य कारण है।

केस दो

कॉस्टमेटिक के दुकानदार अनंत पाठक का कहना है कि चार लाख में दुकान आवंटित कराया। प्रशासन ने जगह-जगह ऐसी बैरिकेडिंग कर दी, जिसकी वजह से ग्राहक ही मार्केट में नहीं आएं। पूरा धंधा चौपट हो गया है। मॉल नहीं बिक रहा है। सात लाख रुपये के घाटे में है। अभी तक किराया भी नहीं निकल सका है।

केस तीन

गर्म कपड़े के बिक्रेता साहिल शर्मा ने बताया कि त्रिवेणी मार्केट में दुकानों की कई बार नीलामी हुई। 120 दुकानों में नब्बे दुकानें दुकानदारों ने ले तो लिया, लेकिन बिक्री न होने की वजह से पूरा धंधा ही चौपट हो गया। साढ़े छह लाख में दुकान तो ले लिया, लेकिन अभी लाखों के घाटे में हैं। दोस्तों से बीस लाख उधार लेकर धंधा शुरू किया। कैसा लौटा पाऊंगा, यह चिंता सता रही है। मेला समाप्त होने के कगार पर हैं।

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