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High Court : खराब गुणवत्ता की सुगंधित सुपारी बेचने के आरोपी को झटका, कोर्ट ने कार्रवाई को बताया सही

Thu, 11 Jul 2024 02:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 11 Jul 2024 02:04 PM IST
सार

मामले में याची झांसी स्थित मेसर्स बालाजी ट्रेडर्स उरई नामक फर्म का मालिक है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने 20 फरवरी 2020 को फर्म का निरीक्षण किया। इस दौरान सुगंधित सुपारी का नमूना लेकर जांच के लिए संबंधित प्रयोगशाला में भेजा गया।

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Shock to the accused of selling scented betel nuts of poor quality, the court said the action was right
अदालत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खराब गुणवत्ता की सुगंधित सुपारी बेचने के मामले में आरोपी फर्म के मालिक और कर्मचारी को राहत देने से इन्कार कर दिया। कहा कि ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई में कोई अवैधता नहीं है, इसलिए आवेदन खारिज किया जाता है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की कोर्ट ने जगदीश प्रसाद और एक अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया।

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मामले में याची झांसी स्थित मेसर्स बालाजी ट्रेडर्स उरई नामक फर्म का मालिक है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने 20 फरवरी 2020 को फर्म का निरीक्षण किया। इस दौरान सुगंधित सुपारी का नमूना लेकर जांच के लिए संबंधित प्रयोगशाला में भेजा गया। रिपोर्ट के अनुसार सुगंधित सुपारी के नमूने में तंबाकू था। साथ ही पैकेट पर शुद्ध मात्रा, वजन, निर्माण की तारीख, बैच नंबर, निर्माता का पूरा पता आदि का उल्लेख भी नहीं था। इस आधार पर मुकदमा पंजीकृत कराया गया। मजिस्ट्रेट ने शिकायत पर आवेदकों को तलब किया, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

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आवेदकों के वकील दलील दी कि सुगंधित सुपारी एक तंबाकू उत्पाद है। इसलिए इसकी बिक्री और विनिर्माण सीओटीपीए 2003 के अंतर्गत आएगा। ऐसे में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत कार्यवाही पूरी तरह से गलत है। अपर शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि सुगंधित सुपारी एक खाद्य पदार्थ है। इसलिए की गई कार्रवाई में कोई अवैधता नहीं है। निरीक्षण के समय आवेदक खाद्य पदार्थ के उत्पादन के लिए लाइसेंस नहीं दिखा सके। इसलिए अधिनियम 2006 के प्रावधान को लागू किया गया।

कोर्ट ने कहा कि फर्म के आवेदकों की इकाई से बरामद सुपारी के नमूने में तंबाकू था, जो अधिनियम 2006 का उल्लंघन है। क्योंकि, सुपारी एक प्राथमिक खाद्य है। आवेदकों के खिलाफ अधिनियम 2006 के तहत की गई कार्रवाई बिल्कुल सही है। कोर्ट ने आवेदकों की याचिका खारिज कर दी।

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