{"_id":"5fe3a3cc8ebc3e3ec81e575f","slug":"shock-to-small-traders-itc-limited-to-five-percent-city-desk-news-ald2948323151","type":"story","status":"publish","title_hn":"छोटे कारोबारियों को झटका, पांच फीसदी पर सीमित हुई आईटीसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छोटे कारोबारियों को झटका, पांच फीसदी पर सीमित हुई आईटीसी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रयागराज। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवम कस्टम विभाग ने छोटे व्यापारियों को झटका दिया है। विभाग द्वारा जारी किए गए एक नोटिफिकेशन के माध्यम से जीएसटी के अंतर्गत किए जाने वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी ) को नियम 36 (4) में संशोधन करके उसे एक जनवरी 2021 से पांच प्रतिशत पर सीमित कर दिया गया है। जबकि पहले यह दस फीसदी पर सीमित था।
बता दें कि पूर्व में व्यापारी जीएसटीआर-3बी भरते समय अपनी किताब के अनुरूप खरीदे गए माल की इनपुट टैक्स क्रेडिट का क्लेम कर लेता था। लेकिन वर्ष 2019 में नियम 36 (4) को लागू करते हुए यह निर्धारित किया गया कि वह बिल जो जीएसटीआर 2 बी में दिखेंगे, उसके अतिरिक्त केवल 20 प्रतिशत की आईटीसी का क्लेम व्यापारी ले सकेगा। इसके बाद दिसंबर 2019 में इसमें एक बार फिर से संशोधन किया गया और उसे दस फीसदी तक सीमित कर दिया गया। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल बताते हैं कि वर्तमान में एक नए नोटिफिकेशन के माध्यम से इस सीमा को घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है। यानी कि अब व्यापारी जीएसटीआर-2 बी में दिखने वाली आईटीसी का पांच अतिरिक्त आईटीसी ले सकता है इससे अधिक नहीं। इसका सबसे बुरा प्रभाव छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा और टैक्स भरते भरते उनकी पूंजी समाप्त हो जाएगी। कैट प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि एक सरल व्यवस्था अधिकारियों के हाथ में कितनी जटिल और दुरुह हो जाती है जीएसटी वर्तमान में इसका एक ज्वलंत उदाहरण बनता जा रहा है।
विज्ञापन
बता दें कि पूर्व में व्यापारी जीएसटीआर-3बी भरते समय अपनी किताब के अनुरूप खरीदे गए माल की इनपुट टैक्स क्रेडिट का क्लेम कर लेता था। लेकिन वर्ष 2019 में नियम 36 (4) को लागू करते हुए यह निर्धारित किया गया कि वह बिल जो जीएसटीआर 2 बी में दिखेंगे, उसके अतिरिक्त केवल 20 प्रतिशत की आईटीसी का क्लेम व्यापारी ले सकेगा। इसके बाद दिसंबर 2019 में इसमें एक बार फिर से संशोधन किया गया और उसे दस फीसदी तक सीमित कर दिया गया। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल बताते हैं कि वर्तमान में एक नए नोटिफिकेशन के माध्यम से इस सीमा को घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है। यानी कि अब व्यापारी जीएसटीआर-2 बी में दिखने वाली आईटीसी का पांच अतिरिक्त आईटीसी ले सकता है इससे अधिक नहीं। इसका सबसे बुरा प्रभाव छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा और टैक्स भरते भरते उनकी पूंजी समाप्त हो जाएगी। कैट प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि एक सरल व्यवस्था अधिकारियों के हाथ में कितनी जटिल और दुरुह हो जाती है जीएसटी वर्तमान में इसका एक ज्वलंत उदाहरण बनता जा रहा है।
विज्ञापन