UP : मेसर्स हैसिंडा प्रोजेक्टस के प्रमोटर्स को झटका, हाईकोर्ट से ईडी जांच का आदेश
यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने चार प्रमोटर्स/याचियों निर्मल सिंह, सुरप्रीत सिंह सूरी, विदुर भारद्वाज और लोट्स 300 अपार्टमेंट एसोसिएशन व अन्य की ओर से दाखिल अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर उन्हें निस्तारित करते हुए दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट से नोएडा स्थित मेसर्स हैसिंडा प्रोजेक्टस प्राईवेट लिमिटेड (एचपीपीएल) के प्रमोटर्स को तगड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने प्रमोटर्स के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर प्रमोटर्स जांच में सहयोग नहीं करते तो ईडी उनके खिलाफ कानूनों के अनुसार कार्रवाई के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी को भी निर्देश दिया है कि वह महीने भर के भीतर फ्लैट खरीदारों के पक्ष में पंजीकृत विलेख निष्पादित कराए।
यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने चार प्रमोटर्स/याचियों निर्मल सिंह, सुरप्रीत सिंह सूरी, विदुर भारद्वाज और लोट्स 300 अपार्टमेंट एसोसिएशन व अन्य की ओर से दाखिल अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर उन्हें निस्तारित करते हुए दिया है।
कोर्ट ने कहा, याची/प्रमोटर्स यह दावा नहीं कर सकते कि वे अब कंपनी के अधिकारी नहीं हैं। उनका कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है और कंपनी की देनदारी केवल कंपनी से ही वसूल की जा सकती है। प्रमोटर्स ने कंपनी का पैसा निकालकर उसे दूसरी कंपनियों में निवेश किया, फिर इस्तीफा देकर कंपनी को दिवालिएपन में ढकेल दिया।
कोर्ट ने कहा, उनका इस्तीफा सिर्फ दिखावा था। वास्तव में यह कदम फ्लैट खरीदारों, बैंकों, नोएडा अथॉरिटी को धोखा देने और बकाया भुगतान से बचने के लिए किया गया था। कोर्ट ने इसे धोखाधड़ी का उत्कृष्ट मामला बताया।
कहा कि प्रमोटर्स ने बिना किसी निवेश के फ्लैट खरीदारों से 636 करोड़ रुपये एकत्र किए। बाद में उसमें से 190 करोड़ निकालकर अपने ही द्वारा बनाई हुई दूसरी कंपनी में निवेश कर दिया। इसके अलावा नोएडा अथॉरिटी की ओर से आवंटित भूमि के एक ही हिस्से को कई-कई फ्लैट खरीदारों को बेचा और उससे कुल 236 करोड़ रुपये एकत्र किए।
इस तरह उन्होंने सैकड़ों खरीदारों को धोखा दिया। इसके बाद कंपनी के मुख्य पदों से इस्तीफा दे दिया और अपने से नीचे कर्मचारियों को प्रमुख पदों पर बिठाकर दिवालिएपन में ढकेलकर देनदारियों से भी छुटकारा पा लिया। राज्य के अधिकारी ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
मामले में प्रमोटर्स को 2010 में नोएडा अथॉरिटी से सेक्टर 107 में GH01 भूमि आवंटित हुई थी। आवंटित भूमि पर उन्हें फ्लैट बनाकर खरीदारों को देना था। प्रमोटर्स ने फ्लैट बनाने से पहले ही खरीदारों से कीमत वसूल ली थी, जिन्हें मिले भी, आधे-अधूरे फ्लैट मिले।
खरीदारों ने याचियों के खिलाफ संबंधित थाने में धोखधड़ी का मामला दर्ज कराया और नोएडा अथॉरिटी के समक्ष शिकायत कर अपने पैसे की वापसी और अपनी करोड़ों की बकाया राशि के भुगतान की मांग की। प्रमोटर्स ने इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी।