{"_id":"61743c9853c28a36b742d536","slug":"shine-city-case-inspector-suspended-for-negligence-in-embezzlement-of-billions","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"शाइन सिटी मामला : अरबों के गबन के केस में लापरवाही पर इंस्पेक्टर सस्पेंड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शाइन सिटी मामला : अरबों के गबन के केस में लापरवाही पर इंस्पेक्टर सस्पेंड
Sat, 23 Oct 2021 10:17 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो , प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो , प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 23 Oct 2021 10:17 PM IST
विज्ञापन
निलंबित
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अरबों का घोटला करने वाले शाइन सिटी कंपनी के निदेशकों, कर्मचारियों पर मेहरबानी सिविल लाइंस थाने के पूर्व और कोरांव थाने के मौजूदा प्रभारी इंस्पेक्टर रविंद्र प्रताप सिंह को भारी पड़ी। आरोपियों पर सिविल लाइंस थाने में दर्ज केस में लापरवाही पर उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। इसके साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दे दिए गए हैं। उधर मुकदमे के तत्कालीन विवेचक एसआई राजेश कुमार सिंह पर भी गाज गिरना तय है। उनके निलंबन के संबंध में रिपोर्ट एसपी जीआरपी को भेज दी गई है।
विज्ञापन
देश भर में धोखाधड़ी करने वाले शाइन सिटी कंपनी के निदेशक व कर्मचारियों ने जनपद में भी हजारों लोगों को चूना लगाया। इनकी धोखाधड़ी का शिकार हुए करीब डेढ़ दर्जन लोगों ने पिछले साल सिविल लाइंस थाने में निदेशक राशिद नसीम व उसके मददगारों आसिफ नफीस, जसीम खां, नीरज श्रीवास्तव व जावेद इकबाल पर नामजद मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में मामला क्राइम ब्रांच और फिर आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को ट्रांसफर हो गया।
विज्ञापन
आरोप है कि राशिद नसीम तो दुबई भाग गए लेकिन अन्य आरोपियों को भी सिविल लाइंस पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी। बार-बार निर्देशित किए जाने के बावजूद उनकी गिरफ्तारी को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। आखिरकार वह फरार हो गए जिनमें मौजूदा समय में एक लाख का इनामी नैनी का जसीम भी शामिल है। मामले में बरती गई लापरवाही के संबंध में शिकायतें आला अफसरों तक भी पहुंचीं जिस पर जांच कराई गई।
विज्ञापन
जांच में सही मिलीं शिकायतें
जांच में शिकायतें सही मिली। यह बात सामने आई कि अरबों रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा मामला होने के बावजूद सिविल लाइंस पुलिस की ओर से मामले में लापरवाही बरती गई। जिसके बाद शनिवार को तत्कालीन इंस्पेक्टर रविंद्र प्रताप सिंह को सस्पेंड कर दिया गया। इसके साथ ही मामले के तत्कालीन विवेचक एसआई राजेश कुमार सिंंह केनिलंबन की भी संस्तुति कर दी गई।
विवेचना के पर्यवेक्षण में लापरवाही पर इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया है। तत्कालीन विवेचक का तबादला हो चुका है और वह वर्तमान में जीआरपी में तैनात है। ऐसे में उसके निलंबन की संस्तुति करते हुए जीआरपी एसपी को रिपोर्ट भेजी गई है। - सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी, डीआईजी
साक्ष्य न मिलने का हवाला देकर छोड़ दिया था एक आरोपी को
जिस मुकदमे के संबंध में इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया, वह पिछले साल सितंबर में दर्ज कराया गया था। पुख्ता सूत्रों का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के कुछ समय बाद एक आरोपी जसीम खां को पकड़कर थाने लाया गया था। लेकिन बाद में बिना कार्रवाई के ही उसे छोड़ दिया गया। जिसका हवाला यह दिया गया कि फिलहाल उसके खिलाफ कोई अभिलेखीय साक्ष्य नहीं मिल सके हैं। इसके बाद ही वह फरार हो गया। जिस पर हाल ही में कंपनी के अन्य कर्मचारियों के साथ ही एक लाख का इनाम घोषित किया गया है।
कई अन्य की भी भूमिका संदिग्ध, रडार पर
सूत्रों का कहना है कि फिलहाल इस मामले में भले ही इंस्पेक्टर व तत्कालीन विवेचक पर गाज गिरी हो लेकिन मुकदमे से संबंधित कई अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध है। यही वजह है कि वह शाइन सिटी के मामलों की जांच में जुटी ईओडब्ल्यू के रडार पर भी हैं। मामले में उनकी ओर से किसी तरह की लापरवाही की बात सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
जांच में शिकायतें सही मिली। यह बात सामने आई कि अरबों रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा मामला होने के बावजूद सिविल लाइंस पुलिस की ओर से मामले में लापरवाही बरती गई। जिसके बाद शनिवार को तत्कालीन इंस्पेक्टर रविंद्र प्रताप सिंह को सस्पेंड कर दिया गया। इसके साथ ही मामले के तत्कालीन विवेचक एसआई राजेश कुमार सिंंह केनिलंबन की भी संस्तुति कर दी गई।
विवेचना के पर्यवेक्षण में लापरवाही पर इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया है। तत्कालीन विवेचक का तबादला हो चुका है और वह वर्तमान में जीआरपी में तैनात है। ऐसे में उसके निलंबन की संस्तुति करते हुए जीआरपी एसपी को रिपोर्ट भेजी गई है। - सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी, डीआईजी
साक्ष्य न मिलने का हवाला देकर छोड़ दिया था एक आरोपी को
जिस मुकदमे के संबंध में इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया, वह पिछले साल सितंबर में दर्ज कराया गया था। पुख्ता सूत्रों का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के कुछ समय बाद एक आरोपी जसीम खां को पकड़कर थाने लाया गया था। लेकिन बाद में बिना कार्रवाई के ही उसे छोड़ दिया गया। जिसका हवाला यह दिया गया कि फिलहाल उसके खिलाफ कोई अभिलेखीय साक्ष्य नहीं मिल सके हैं। इसके बाद ही वह फरार हो गया। जिस पर हाल ही में कंपनी के अन्य कर्मचारियों के साथ ही एक लाख का इनाम घोषित किया गया है।
कई अन्य की भी भूमिका संदिग्ध, रडार पर
सूत्रों का कहना है कि फिलहाल इस मामले में भले ही इंस्पेक्टर व तत्कालीन विवेचक पर गाज गिरी हो लेकिन मुकदमे से संबंधित कई अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध है। यही वजह है कि वह शाइन सिटी के मामलों की जांच में जुटी ईओडब्ल्यू के रडार पर भी हैं। मामले में उनकी ओर से किसी तरह की लापरवाही की बात सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।