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शास्त्री पुल के दक्षिणी लेन की सड़क धंसी, मचा हड़कंप
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 27 Jun 2015 01:45 AM IST
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झूंसी (ब्यूरो)। गंगा नदी पर बने शास्त्री पुल के इलाहाबाद-झूंसी लेन की सड़क शुक्रवार को एक बार फिर धंस गई। इससे राहगीरों में खलबली मच गई। राहगीरों की सूचना पर पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी मौके पर पहुंचे तथा डैमेज वाले एरिया को बालू भारी बोरियों से घेर दिया है। पुल के दो पिलरों के बीच की सड़क में तकरीबन दो इंच का गैप आ गया है। इससे पुल की सड़क धंस गई है। शनिवार को मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा। इसके पहले पुल पर आवागमन भी बंद किया जाएगा। शुक्रवार की देर शाम को भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी। दो पहिया वाहनों की आवाजाही सुचारू रखी गई थी। शास्त्री पुल की सड़क के धंसने का सिलसिला पिछले तीन माह से चल रहा है। इससे लोगों को भारी दिक्कत उठानी पड़ रही है।
पुल के दक्षिणी लेन से शुक्रवार की दोपहर राहगीर गुजर रहे थे। तभी उनकी नजर दो पिलरों के बीच आए गैप पर पड़ी तो सन्न रह गए। दक्षिणी लेन के पिलर नंबर आठ और नौ को जोड़ने वाले स्थान पर सड़क तकरीबन दो इंच धंस गई थी। इसकी जानकारी लोगों ने प्रशासन को दी। सूचना पर शाम तकरीबन चार बजे पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी मौके पर पहुंचे तथा निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पता चला कि पिलर के बेयरिंग के कटने से रोलर समेत स्प्रिंग डैमेज हो गया है। इससे दो पिलरों के जोड़ने वाले हिस्से में गैप आ गया है। दो पिलरों के बीच गैप देखकर कर्मचारियों के भी होश उड़ गए। फिलहाल डैमेज वाले स्थान के चारों तरफ बालू की भरी बोरियां रखकर घेर दिया गया है। पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों ने बताया कि मामले की जानकारी विभाग के आला अफसरों को दे दी गई है।
शनिवार की सुबह दक्षिणी लेन पर आवागमन पूरी तरह ठप कर मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा। बता दें कि पिछले माह की 21 तारीख को भी दक्षिणी लेन की सड़क तकरीबन पांच इंच धंस गई थी। इसे ठीक करने में चार से पांच दिन लगे थे। तब तक दूसरी लेन से दोनों ओर के वाहनों को गुजारा गया था। इस दौरान कई हादसे भी हुए थे। 17 मार्च 2015 को पुल के 28 नंबर पिलर में खराबी आई थी। पिलर के बीच तकरीबन डेढ़ इंच का गैप आ गया था। हालांकि एक दिन के मरम्मत कार्य के बाद पुल पर आवागमन चालू कर दिया गया था।
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शास्त्री पुल के इलाहाबाद-झूंसी लेन की हालत पिछले एक दशक से खराब चल रही है। पुल की दक्षिणी लेन में 2003 से लेकर अब तक आधा दर्जन से ज्यादा दफे खराबी आ चुकी है। इसके पहले पुल की देखरेख की जिम्मेदारी एनएचआई पर थी लेकिन तकरीबन चार साल पहले इसे पीडब्ल्यूडी को सौंप दिया गया। इसके बावजूद आए दिन किसी न किसी पिलर में खराबी उत्पन्न हो जा रही है। सितंबर 2003 में दक्षिणी लेन के अंतिम हिस्से में तकरीबन दो फीट का गैप आ गया था।
तब सप्ताह भर पुल की लेन को बंद कर मरम्मत कार्य किया गया था। 20 नवंबर 2005 में एक बार फिर पुल की दक्षिणी लेन के पाए में खराबी आ गई। मरम्मत कार्य तकरीबन दस दिन तक चला था। इस दौरान पुल पर ट्रैफिक वन वे होने के कारण हादसे में एक दवा कंपनी के एमआर सुब्रत विश्वास को अपनी जान भी गंवानी पड़ी थी। इसके बाद 2007 तथा 2011 में भी इसी लेन के पिलर में गैप आने से कई दिनों तक आवागमन ठप कर मरम्मत कार्य चला था।
तकरीबन तीन साल पहले प्रयाग में लगे महाकुंभ के दौरान मेले के बजट से पुल की मरम्मत कराई गई थी। कुंभ से करोड़ों रुपये का बजट पुल की मरम्मत को दिया गया था। पीडब्ल्यूडी ने पुल की सड़क को दुरुस्त कर मैस्ट्रिक टर्फ के रबर के साथ-साथ स्ट्रीट लाइट और रेलिंग आदि को ठीक कराया गया था। इसके बावजूद इन दिनों दुर्दशा का शिकार है। पुल के पिलरों के जर्जर होने के साथ ही स्ट्रीट लाइटों के न जलने से रात में राहजनी की भी आशंका भी बनी हुई है।
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पुल के दक्षिणी लेन से शुक्रवार की दोपहर राहगीर गुजर रहे थे। तभी उनकी नजर दो पिलरों के बीच आए गैप पर पड़ी तो सन्न रह गए। दक्षिणी लेन के पिलर नंबर आठ और नौ को जोड़ने वाले स्थान पर सड़क तकरीबन दो इंच धंस गई थी। इसकी जानकारी लोगों ने प्रशासन को दी। सूचना पर शाम तकरीबन चार बजे पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी मौके पर पहुंचे तथा निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पता चला कि पिलर के बेयरिंग के कटने से रोलर समेत स्प्रिंग डैमेज हो गया है। इससे दो पिलरों के जोड़ने वाले हिस्से में गैप आ गया है। दो पिलरों के बीच गैप देखकर कर्मचारियों के भी होश उड़ गए। फिलहाल डैमेज वाले स्थान के चारों तरफ बालू की भरी बोरियां रखकर घेर दिया गया है। पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों ने बताया कि मामले की जानकारी विभाग के आला अफसरों को दे दी गई है।
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शनिवार की सुबह दक्षिणी लेन पर आवागमन पूरी तरह ठप कर मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा। बता दें कि पिछले माह की 21 तारीख को भी दक्षिणी लेन की सड़क तकरीबन पांच इंच धंस गई थी। इसे ठीक करने में चार से पांच दिन लगे थे। तब तक दूसरी लेन से दोनों ओर के वाहनों को गुजारा गया था। इस दौरान कई हादसे भी हुए थे। 17 मार्च 2015 को पुल के 28 नंबर पिलर में खराबी आई थी। पिलर के बीच तकरीबन डेढ़ इंच का गैप आ गया था। हालांकि एक दिन के मरम्मत कार्य के बाद पुल पर आवागमन चालू कर दिया गया था।
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शास्त्री पुल के इलाहाबाद-झूंसी लेन की हालत पिछले एक दशक से खराब चल रही है। पुल की दक्षिणी लेन में 2003 से लेकर अब तक आधा दर्जन से ज्यादा दफे खराबी आ चुकी है। इसके पहले पुल की देखरेख की जिम्मेदारी एनएचआई पर थी लेकिन तकरीबन चार साल पहले इसे पीडब्ल्यूडी को सौंप दिया गया। इसके बावजूद आए दिन किसी न किसी पिलर में खराबी उत्पन्न हो जा रही है। सितंबर 2003 में दक्षिणी लेन के अंतिम हिस्से में तकरीबन दो फीट का गैप आ गया था।
तब सप्ताह भर पुल की लेन को बंद कर मरम्मत कार्य किया गया था। 20 नवंबर 2005 में एक बार फिर पुल की दक्षिणी लेन के पाए में खराबी आ गई। मरम्मत कार्य तकरीबन दस दिन तक चला था। इस दौरान पुल पर ट्रैफिक वन वे होने के कारण हादसे में एक दवा कंपनी के एमआर सुब्रत विश्वास को अपनी जान भी गंवानी पड़ी थी। इसके बाद 2007 तथा 2011 में भी इसी लेन के पिलर में गैप आने से कई दिनों तक आवागमन ठप कर मरम्मत कार्य चला था।
तकरीबन तीन साल पहले प्रयाग में लगे महाकुंभ के दौरान मेले के बजट से पुल की मरम्मत कराई गई थी। कुंभ से करोड़ों रुपये का बजट पुल की मरम्मत को दिया गया था। पीडब्ल्यूडी ने पुल की सड़क को दुरुस्त कर मैस्ट्रिक टर्फ के रबर के साथ-साथ स्ट्रीट लाइट और रेलिंग आदि को ठीक कराया गया था। इसके बावजूद इन दिनों दुर्दशा का शिकार है। पुल के पिलरों के जर्जर होने के साथ ही स्ट्रीट लाइटों के न जलने से रात में राहजनी की भी आशंका भी बनी हुई है।