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शंकराचार्य ने शुरू कराया अस्थाई बाल राममंदिर निर्माण
Tue, 21 Jan 2020 01:41 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 21 Jan 2020 01:41 AM IST
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avimukteshwaranand
- फोटो : प्रयागराज
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द्वारका-शारदा एवं ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने अयोध्या में अंकोरवाट की तर्ज पर भव्य राम मंदिर निर्माण का फैसला लिया है। इस मंदिर का शिखर 1008 किलो सोने से मढ़ा जाएगा। इससे पहले चंदन की लकड़ी से भगवान राम के अस्थाई बाल मंदिर का निर्माण आरंभ करा दिया है। यह जानकारी सोमवार को त्रिवेणी मार्ग स्थित माघ मेला के शिविर में शंकराचार्य के प्रतिनिधि और श्रीराम जन्मभूमि रामालय न्यास के सचिव स्वामी अविवमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने दी।
माघ मेला शिविर में पत्रकारों से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राममंदिर निर्माण संबंधी शंकराचार्य की कार्ययोजना का बिंदुवार विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायाय के फैसले के बाद सभी चाहते हैं कि शीघ्र राममंदिर का निर्माण आरंभ होना चाहिए। ऐसे में लोक भावना को ध्यान में रखते हुए शंकराचार्य ने मकर संक्रांति पर सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही अस्थाई बाल मंदिर का निर्माण आरंभ करा दिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शास्त्रों का हवाला देते हुए बताया कि जहां पहले से कोई मंदिर हो और जीर्ण शीर्ण हो गया हो, वहां नया निर्माण नहीं बल्कि जीर्णोद्धार कराया जाता है। अयोध्या में भी निर्मित होने वाला मंदिर नव निर्माण नहीं, जीर्णोद्धार की श्रेणी में आएगा।
उन्होंने बताया कि फिलहाल शंकराचार्य के निर्देश पर बाल मंदिर का निर्माण चंदन की लकड़ी से कराया जा रहा है। इसका आकार 24 फीट लंबा और इतना ही चौड़ा और 36 फीट ऊंचा होगा। इसके मध्य रामलला विराजमान का नौ फीट ऊंचा सिंहासन भी होगा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को नियमावली बनाकर उचित ट्रस्ट को भूमि सौंपने का लिए तीन माह का समय दिया है। जबकि चारों पीठों के शंकराचार्यों, पांचों वैष्णवाचार्यों और तेरहों अखाड़ों के रामालय न्यास नें केंद्र सरकार के समक्ष मंदिर निर्माण की अपनी प्रतिबद्धता रख दी है। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य अंकोरवाट की तर्ज पर विश्व में अद्वितीय राममंदिर का निर्माण चाहते हैं। इस मंदिर का शिकर 1008 किलो सोने से मढ़ा जाएगा। इसके लिए देश के हर गांव से सोना इकट्ठा किया जाएगा। इस मंदिर में एक साथ 100008 लोगों के एक साथ दर्शन व प्रसाद ग्रहण करने की सुविधा होगी।
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हर गांव-मोहल्ले से संग्रह होगा एक ग्राम सोना
प्रयागराज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि राम मंदिर निर्माण के लिए प्रत्येक गांव व शहर के हर मोहल्ले से एक ग्राम सोना संग्रह करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका निर्णय 22 जनवरी को प्रयाग में होने वाली संत-भक्त संसद में लिया जाएगा। शंकराचार्य के शिविर में मंगलवार को प्रस्तावित मंदिर के मॉडल को दर्शनार्थ रखा जाएगा।
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माघ मेला शिविर में पत्रकारों से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राममंदिर निर्माण संबंधी शंकराचार्य की कार्ययोजना का बिंदुवार विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायाय के फैसले के बाद सभी चाहते हैं कि शीघ्र राममंदिर का निर्माण आरंभ होना चाहिए। ऐसे में लोक भावना को ध्यान में रखते हुए शंकराचार्य ने मकर संक्रांति पर सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही अस्थाई बाल मंदिर का निर्माण आरंभ करा दिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शास्त्रों का हवाला देते हुए बताया कि जहां पहले से कोई मंदिर हो और जीर्ण शीर्ण हो गया हो, वहां नया निर्माण नहीं बल्कि जीर्णोद्धार कराया जाता है। अयोध्या में भी निर्मित होने वाला मंदिर नव निर्माण नहीं, जीर्णोद्धार की श्रेणी में आएगा।
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उन्होंने बताया कि फिलहाल शंकराचार्य के निर्देश पर बाल मंदिर का निर्माण चंदन की लकड़ी से कराया जा रहा है। इसका आकार 24 फीट लंबा और इतना ही चौड़ा और 36 फीट ऊंचा होगा। इसके मध्य रामलला विराजमान का नौ फीट ऊंचा सिंहासन भी होगा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को नियमावली बनाकर उचित ट्रस्ट को भूमि सौंपने का लिए तीन माह का समय दिया है। जबकि चारों पीठों के शंकराचार्यों, पांचों वैष्णवाचार्यों और तेरहों अखाड़ों के रामालय न्यास नें केंद्र सरकार के समक्ष मंदिर निर्माण की अपनी प्रतिबद्धता रख दी है। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य अंकोरवाट की तर्ज पर विश्व में अद्वितीय राममंदिर का निर्माण चाहते हैं। इस मंदिर का शिकर 1008 किलो सोने से मढ़ा जाएगा। इसके लिए देश के हर गांव से सोना इकट्ठा किया जाएगा। इस मंदिर में एक साथ 100008 लोगों के एक साथ दर्शन व प्रसाद ग्रहण करने की सुविधा होगी।
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हर गांव-मोहल्ले से संग्रह होगा एक ग्राम सोना
प्रयागराज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि राम मंदिर निर्माण के लिए प्रत्येक गांव व शहर के हर मोहल्ले से एक ग्राम सोना संग्रह करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका निर्णय 22 जनवरी को प्रयाग में होने वाली संत-भक्त संसद में लिया जाएगा। शंकराचार्य के शिविर में मंगलवार को प्रस्तावित मंदिर के मॉडल को दर्शनार्थ रखा जाएगा।