Mahakumbh : शंकराचार्य सदानंद बोले- परशुराम परिषद का कार्य सराहनीय, इसकी तुलना किसी से नहीं
राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक सुनील भराला ने बताया कि महाकुंभ के तहत राष्ट्रीय परशुराम परिषद की ओर से 144 स्वर्ण दिव्य महाकुंभ प्रयागराज महाशिविर का आयोजन किया गया।इस दौरान भगवान श्री परशुराम जी की 1,08,000 मूर्तियों का विभिन्न घाटों पर वितरण किया गया। साथ ही एक करोड़ आठ हजार से अधिक श्रद्धालुओं को परशुराम चालीसा और पांचांग प्रदान किया गया।
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राष्ट्रीय परशुराम परिषद की ओर से महाकुंभ में आयोजित महाशिविर में 44वें दिनों से चल रहे कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। परिषद के संस्थापक व निवर्तमान राज्यमंत्री पंडित सुनील भराला ने लगातार प्रवास कर भगवान परशुराम के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। शिविर में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती, द्वारका शारदा पीठ सहित चार दर्जन से अधिक सांसदों, विधायकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जिनमें राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र आदि शामिल रहे।
भराला ने बताया कि महाकुंभ के तहत राष्ट्रीय परशुराम परिषद की ओर से 144 स्वर्ण दिव्य महाकुंभ प्रयागराज महाशिविर का आयोजन किया गया।इस दौरान भगवान श्री परशुराम जी की 1,08,000 मूर्तियों का विभिन्न घाटों पर वितरण किया गया। साथ ही एक करोड़ आठ हजार से अधिक श्रद्धालुओं को परशुराम चालीसा और पांचांग प्रदान किया गया। महाशिविर में प्रतिदिन तीन समय श्री परशुराम कथा एवं धर्म संसद का आयोजन किया गया, जिसमें चारों शंकराचार्यों, अनेक संत-महात्माओं एवं धर्माचार्यों ने धर्म, संस्कृति और सनातन पर विचार रखे।
इस अवसर पर आयोजित महायज्ञ में दर्जनों आचार्यों द्वारा वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ आहुतियां दी गईं, जो देश की समृद्धि एवं सनातन धर्म के उत्थान के लिए समर्पित रहीं। इस सत्र की अध्यक्षता काशी सुमेरु पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने की जबकि गंगा समग्र के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामाशीष जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
एक करोड़ से अधिक लोगों ने ली सेल्फी
महाशिविर में प्रतिष्ठापित भगवान श्री परशुराम जी की 51 फीट ऊंची भव्य मूर्ति को श्रद्धालुओं का अपार स्नेह मिला। अब तक एक करोड़ से अधिक लोगों ने इस मूर्ति के साथ सेल्फी ली एवं दर्शन किए। इस अवसर पर स्वामी राम शंकर (डिजिटल बाबा), स्वामी प्रभु चैतन्यनंद, स्वामी अर्जुनानंद, स्वामी नरेशानंद, स्वाती दिगंबर अखिलेश पुरी महाराज, रमेश पुरी जी महाराज (निरंजनी अखाड़ा), स्वामी महाराज पुरी महाराज, श्यामल दास (वृंदावन), स्वामी योगानंद जी ब्रह्मचारी, सोपान महाराज और विवेक गौतम सहित अनेक संत-महात्माओं ने अपने विचार रखे।
महाशिविर में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में देशभर से आए प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी ओजस्वी व भावपूर्ण रचनाओं के माध्यम से भगवान परशुराम जी के चरित्र, शौर्य एवं आदर्शों का भावपूर्ण चित्रण किया। इस अवसर पर रुचि चतुर्वेदी जी, तुषा शर्मा जी, सात्विक नीलदीप जी, गोपाल पांडेय, आज़ाद जी, पदम गौतम, मनोज मधुबन और ललित तिवारी जैसे ख्यातिप्राप्त कवियों ने अपनी सशक्त कविताओं से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। इस विशेष अवसर पर राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक सुनील भराला जी ने परशुराम जी के आदर्शों, उनके योगदान और सनातन धर्म में उनकी प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की।
कार्यक्रम में परशुराम स्वाभिमान सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय भारद्वाज, शिव प्रकाश मिश्रा सेनानी एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट, राजपुरोहित आचार्य मधुर जी, महेंद्र कनोडिया, शिविर प्रमुख संतोष पंडित, अशोक शर्मा, गोविंद दीक्षित, डॉ. प्रियंका शुक्ला, सुमन साहू, मनोज शर्मा, मुनीश शुक्ला, महेंद्र जोशी, रमेश चंद्र शर्मा, सुरेश पांडेय, रमेश चंद्र दुबे, मोहन ठाकुर, जितेंद्र शर्मा आदि रहे।
महाकुंभ में राष्ट्रीय परशुराम परिषद द्वारा आयोजित यह महाशिविर ऐतिहासिक सिद्ध हुआ, जिसने सनातन संस्कृति, धर्म एवं भगवान परशुराम के वैभव को जन-जन तक पहुंचाया गंगा समग्र के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामाशीष, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि गंगा समग्र एक परियोजना है। यह परियोजना गंगा नदी के पर्यावरण को संरक्षित करने, जल की गुणवत्ता को सुधारने और नदी में प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से कार्य कर रही है। इस परियोजना के तहत विभिन्न कदम उठाए गए हैं, जिनमें जल निकासी, शुद्धीकरण, जल पुनर्चक्रण और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय शामिल हैं।
गंगा समग्र का प्रमुख उद्देश्य गंगा नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाना है ताकि यह न सिर्फ जल स्रोत के रूप में कार्य करें, बल्कि पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी लाभकारी रहे। इस परियोजना में गंगा के पूरे मार्ग पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक की सभी प्रमुख स्थानों का ध्यान रखा गया है। इसके अलावा, गंगा की महत्ता को जागरूक करने के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक पहले भी जोड़ी गई हैं। गंगा समग्र का उद्देश्य न केवल नदी की सफाई है, बल्कि स्थानीय समुदायों को नदी के महत्व के प्रति जागरूक करना और उनके लिए सतत विकास की दिशा में कदम उठाना भी है।