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Prayagraj : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेले में निकाली गौ प्रतिष्ठा प्रेरणा यात्रा, जगह-जगह स्वागत
Mon, 26 Jan 2026 01:50 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 26 Jan 2026 01:50 PM IST
सार
माघ मेले में अपने शिविर त्रिवेणी मार्ग के सामने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना नौवें दिन भी जारी रहा। इस दौरान शंकराचार्य ने माघ मेले में गौ प्रतिष्ठा प्रेरणा यात्रा निकाली और अनेक शिविरों में जाकर गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने के लिए समर्थन मांगा।
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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का स्वागत करते राष्ट्रीय परशुराम परिषद के अध्यक्ष पं.अशोक शर्मा।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
माघ मेले में अपने शिविर त्रिवेणी मार्ग के सामने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना नौवें दिन भी जारी रहा। इस दौरान शंकराचार्य ने माघ मेले में गौ प्रतिष्ठा प्रेरणा यात्रा निकाली और अनेक शिविरों में जाकर गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने के लिए चलाए जा रहे अभियान के लिए समर्थन मांगा। उनके साथ बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद रहे। सेक्टर नंबर छह में राष्ट्रीय परशुराम परिषद के दिव्य माघ मेला शिविर में जगद्गुरु शंकराचार्य का स्वागत किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. अशोक शर्मा ने उनका अभिनंदन किया। इसके अलावा शंकराचार्य ने कई शिविरों में जाकर साधु संतों और धर्माचार्यों के साथ संवाद किया।
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शंकराचार्य के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने बताया कि माघ मेले में चल रही “गौ प्रतिष्ठा प्रेरणा यात्रा निरंतर गतिशील है। साधु संतों और धर्माचार्यों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। सब लोग गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग का समर्थन कर रहे हैं। लोगों ने गौ हत्या पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की है। कहा कि शंकराचार्य जी का मानना है कि “बिना गौ माता के हिन्दू धर्म की कल्पना नहीं कर सकते, वही हमारे धर्म, संस्कृति और परंपरा का मूल है।”
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उन्होंने आगे कहा कि गौ संरक्षण केवल भावनात्मक विषय नहीं, बल्कि सभ्यता, कृषक-जीवन, आयुर्वेद और धर्म का आधार है।अनेक शिविरों में उपस्थित संतों ने गौ आधारित कृषि, गौवंशीय उत्पाद, एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा गौ माता से जुड़ी है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि गौ रक्षा को संकल्प से जोड़ा जाए, न कि केवल विचार से। इस मौके पर दंडी संन्यासी स्वामी प्रत्यक्चैतन्य मुकुंदानंद गिरी जी, स्वामी अप्रमेय शिवशाक्षत कृतानंद जी, पूर्व मंत्री महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा, ब्रह्मचारी सहजानंद जी, ब्रह्मचारी तीर्थानंद जी, ब्रह्मचारी श्रवणानंद जी,अखिलेश ब्रह्मचारी, देवेंद्र पांडे गोप आदि रहे।
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