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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Shankaracharya Avimukteshwaranand Establishment of Hindu nation is impossible without stopping cow slaughter.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले : गो हत्या रोके बिना हिंदू राष्ट्र की स्थापना असंभव

Fri, 09 Feb 2024 07:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 09 Feb 2024 07:32 PM IST
सार

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि गो हत्या को रोके बिना भारत हिंदू राष्ट्र नहीं हो सकता है। धर्म की रक्षा करने के लिए धर्म को अपनाना जरूरी है। आज के नेताओं का हिंदुत्व राजनीतिक है। 

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Shankaracharya Avimukteshwaranand Establishment of Hindu nation is impossible without stopping cow slaughter.
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा राजा को धर्म से जोड़ना खतरनाक है। शत्रुओं से घिरे राजा की पराजय भी हो सकती है, अगर धर्म को राजा से जोड़ दिया गया तो राजा की पराजय के साथ धर्म भी हार हो जाएगी।

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मौनी अमावस्या के मौके पर प्रयागराज पहुंचे शंकराचार्य ने वार्ता के दौरान कहा कि राजनेताओं का हिंदुत्व राजनैतिक है। गोहत्या रोके बिना हिंदू राष्ट्र की स्थापना असंभव है। उन्होंने कहा जिस तरह हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए गोहत्या को रोकना जरूरी है, उसी तरह स्वस्थ राजनीति तभी हो सकती है जब देश का राजा संविधान रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हो।

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एक हजार साल की गुलामी के बाद भी बचा है धर्म

आगे कहा कि राजा के शत्रु हर समय होते हैं। कोई भी राजा हो उसके शत्रु होते ही हैं। राजा को गिराने की कोशिश उसके शत्रु हर समय करते हैं। बलवान राजा भी असावधानी के कारण गिर सकता है। राजा पर धर्म को निर्भर नहीं कर सकते। राजा किसी भी कारण से पराजित हो गया तो धर्म भी हार जाएगा। एक हजार गुलामी के बाद भी देश में धर्म बचा है, क्योंकि धर्म राजा पर आश्रित नहीं था।











धर्म को जीवन का अंग बनाना ही धर्म की रक्षा है। आज राजनेता राज और सत्ता के लिए हिंदुत्व की बात कर रहे हैं। आज भी गायें कट रही हैं। नेताओ का हिंदुत्व राजनीतिक है। इससे कोई फायदा जनता को नहीं है। जीवन में धर्म को उतारने से ही धर्म की रक्षा होगी। हिंदू धर्म जीवन का सर्वांगीण विकास और आध्यात्मिक उन्नयन के लिए है। देश के संविधान में परलोक की बात ही नहीं है। संविधान एकांगी है। परलोक सुधारने लिए धर्म को अपनाना ही पड़ेगा। संविधान से परलोक नहीं सुधर सकता। 

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