फैसला : सत्रह साल बाद बरेली पैसेंजर डकैती के तीन आरोपियों को सात साल की कैद
इलाहाबाद -बरेली पैसेंजर में डकैती का यह मामला छह मार्च 2007 का है। तब ट्रेन इलाहाबाद से बरेली की ओर जा रही थी। उसी बीच फाफामऊ स्टेशन से आगे सराय गोपाल स्टेशन के बीच स्लीपर कोच में यात्रा कर रहे सुनील कुमार सिंह के परिवार के साथ ट्रेन में घुसे पांच लोगों ने डकैती की वारदात को अंजाम दिया था।
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जिला अदालत ने सत्रह साल पहले इलाहाबाद बरेली पैसेंजर में हुई डकैती के तीन आरोपियों को सात साल की कैद और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला शुक्रवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर जिला व सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार गौतम ने सुनाया। दोषी पाया गया सुनील शर्मा रायबरेली के डीह गांव का निवासी है, जबकि बबलू उर्फ लाल चंद्र विश्वकर्मा गोरखपुर के बेलाघाट थाना क्षेत्र के सपुरपुर गांव का है। इस मामले में तीसरा आरोपी विजय तिवारी जिला सुल्तानपुर के आशापुर गांव का मूल निवासी है। ये तीनों मौजूदा समय में पंजाब के लुधियाना में रह रहे हैं।
इलाहाबाद -बरेली पैसेंजर में डकैती का यह मामला छह मार्च 2007 का है। तब ट्रेन इलाहाबाद से बरेली की ओर जा रही थी। उसी बीच फाफामऊ स्टेशन से आगे सराय गोपाल स्टेशन के बीच स्लीपर कोच में यात्रा कर रहे सुनील कुमार सिंह के परिवार के साथ ट्रेन में घुसे पांच लोगों ने डकैती की वारदात को अंजाम दिया था। 19 मार्च को रेलवे पुलिस ने घटना में शामिल रहे सुनील शर्मा, बबलू उर्फ लाल चंद्र विश्वकर्मा, विजय तिवारी, किशन लाल, संतोष यादव उर्फ कालिया को गिरफ्तार कर लूट के समान की बरामदगी की थी।
मामले की विवेचना के बाद रेलवे मजिस्ट्रेट की अदालत में पांचों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ था। इसके बाद मामला जिला न्यायालय इलाहाबाद में स्थानांतरित हो गया। 17 साल चले विचारण के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गुलाब चंद्र अग्रहरि और एडीजीसी मृत्युंजय तिवारी ने अभियोजन की ओर से 11 गवाह पेश किए थे। इस बीच किशन लाल और संतोष यादव ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया था, जबकि सुनील, बबलू , और विजय ने जुर्म इकबाल करने से इन्कार कर दिया था। लगभग 17 साल बाद उन्हें अदालत ने दोषी करार दिया और सात साल की कैद के साथ 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।