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अपहरणकर्ता की उम्रकैद की सजा माफ, सजा हाईकोर्ट घटाई
Wed, 08 Jul 2020 08:02 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 08 Jul 2020 08:02 PM IST
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- फोटो : prayagraj
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दो लोगों का अपहरण करने के जुर्म में उम्रकैद की सजा पाए अभियुक्त की सजा इलाहाबाद हाईकोर्ट ने घटाते हुए सात वर्ष कर दी है। कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त पर लगाया गया फिरौती के लिए अपहरण का आरोप साबित नहीं होता है इसलिए उसे सिर्फ सात वर्ष की सजा देना पर्याप्त है। चूंकि अभियुक्त इससे अधिक समय जेल में बिता चुका है इसलिए उसे रिहा करने का आदेश दिया है। अलीगढ़ के पप्पू उर्फ योगेंद्र की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति एसडी सिंह की पीठ ने दिया है।
पप्पू को एफटीसी कोर्ट अलीगढ़ ने तीन अप्रैल 2010 में फिरौती के लिए दो लोगों का अपहरण करने के जुर्म मेें उम्रकैद और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दाखिल अपील पर बहस के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता का कहना था कि पुलिस की जांच और अपह्त किए गए दोनों व्यक्तियों के बयान से कहीं से यह साबित नहीं होता है कि उनसे अपहरण के बाद फिरौती मांगी गई या जान से मारने की धमकी दी गई। अपहरण करने का उद्देश्य भी साबित नहीं है। ऐसे में फिरौती के लिए अपहरण की धारा 364 ए के अपराध नहीं बनता है।
मामले के अनुसार 29 जनवरी 2003 को छर्रा थानाक्षेत्र के रूमानी गांव से नेम सिंह और अनोखे लाल का कुछ लोग जीप में अपहरण कर ले गए। इसकी प्राथमिकी 30 जनवरी को रामपाल ने दर्ज कराई। जांच के दौरान 11 फरवरी 2003 को पुलिस को एक जीप में सवार कुछ लोग दिखाए दिए। जीत में दोनों अपह्त नेम सिंह और अनोखेलाल भी थे जिनके हाथपैर बांधे गए थे।
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पुलिस से अभियुक्तों की मुठभेड़ हुई और गोलीबारी के दौरान नेमसिंह तथा अनोखेलाल खुद को छुड़ाकर भाग निकले। अभियुक्त पकड़े गए। पुलिस ने फिरौती के लिए अपहरण के मामले में चार्जशीट पेश की। जिस पर दोनों अपह़त व्यक्तियों का बयान दर्ज करने के बाद अधीनस्थ न्यायालय ने सजा सुनाई।
अपील पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि दोनों व्यक्तियों के बयान और पुलिस की विवेचना से यह साबित नहीं होता है कि अपह्त व्यक्तियों के परिवार से कोई फिरौती मांगी गई थी। दोनों अपह्तों ने जान से मारने की धमकी देने जैसा कोई आरोप भी अपने बयान में नहीं लगाया है। इससे फिरौती के लिए अपहरण की बात साबित नहीं होती है।
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पप्पू को एफटीसी कोर्ट अलीगढ़ ने तीन अप्रैल 2010 में फिरौती के लिए दो लोगों का अपहरण करने के जुर्म मेें उम्रकैद और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दाखिल अपील पर बहस के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता का कहना था कि पुलिस की जांच और अपह्त किए गए दोनों व्यक्तियों के बयान से कहीं से यह साबित नहीं होता है कि उनसे अपहरण के बाद फिरौती मांगी गई या जान से मारने की धमकी दी गई। अपहरण करने का उद्देश्य भी साबित नहीं है। ऐसे में फिरौती के लिए अपहरण की धारा 364 ए के अपराध नहीं बनता है।
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मामले के अनुसार 29 जनवरी 2003 को छर्रा थानाक्षेत्र के रूमानी गांव से नेम सिंह और अनोखे लाल का कुछ लोग जीप में अपहरण कर ले गए। इसकी प्राथमिकी 30 जनवरी को रामपाल ने दर्ज कराई। जांच के दौरान 11 फरवरी 2003 को पुलिस को एक जीप में सवार कुछ लोग दिखाए दिए। जीत में दोनों अपह्त नेम सिंह और अनोखेलाल भी थे जिनके हाथपैर बांधे गए थे।
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पुलिस से अभियुक्तों की मुठभेड़ हुई और गोलीबारी के दौरान नेमसिंह तथा अनोखेलाल खुद को छुड़ाकर भाग निकले। अभियुक्त पकड़े गए। पुलिस ने फिरौती के लिए अपहरण के मामले में चार्जशीट पेश की। जिस पर दोनों अपह़त व्यक्तियों का बयान दर्ज करने के बाद अधीनस्थ न्यायालय ने सजा सुनाई।
अपील पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि दोनों व्यक्तियों के बयान और पुलिस की विवेचना से यह साबित नहीं होता है कि अपह्त व्यक्तियों के परिवार से कोई फिरौती मांगी गई थी। दोनों अपह्तों ने जान से मारने की धमकी देने जैसा कोई आरोप भी अपने बयान में नहीं लगाया है। इससे फिरौती के लिए अपहरण की बात साबित नहीं होती है।