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महाकुंभ नगरी में देखिए रूसी संस्कार
इलाहाबाद/ब्यूरो
Updated Sun, 20 Jan 2013 04:06 PM IST
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रूसी नागरिक क्या खाते हैं, क्या ओढ़ते-पहनते हैं, उनकी दिनचर्या कैसे बीतती है, यह देखना हो तो कुंभ नगरी पहुंचें। तंबुओं की नगरी में रूसियों ने भी ठौर तलाश लिया है और अपनी संस्कृति में रच-बस भी गए हैं।
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डेढ़ सौ से ज्यादा रूसी पायलट बाबा के शिविर में शरण ले चुके हैं जबकि सैकड़ों रूसियों का आना अभी बाकी है। उनके ठहरने के लिए शिविर में विशेष व्यवस्था की जा रही है। वहां रशियन डोम और दिव्य लोक रशियन कैंप बनाया जा रहा है, जो रूसियों को उनके देश जैसी अनुभूति कराएगा। डोम और कैम्प तकरीबन तैयार हो चुके हैं।
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पायलट बाबा का भव्य पंडाल सेक्टर-9 में स्थापित किया गया है लेकिन रशियन डोम रूसी नागरिकों ने खुद तैयार किया है। वहां दो डोम बनाए गए हैं। एक डोम छोटा और दूसरा बड़ा है। छोटे डोम में एक साथ 50 लोग ठहर सकते हैं तो बड़े डोम में सैकड़ों की संख्या में लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। छोटा डोम पारदर्शी है, जो प्लास्टिक से बना प्रतीत होता है।
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खास यह है कि डोम पूरी तरह से फायरप्रूफ और वाटरप्रूफ है। ऐसे में बारिश हो या आग लगे, न तो कोई दिक्कत और न ही किसी तरह का खतरा। शिविर में रशियन डोम के अलावा दिव्य लोक रशियन कैंप भी लगाया गया है, जो रूसी खान-पान और संस्कृति का परिचायक है। यह लकड़ी का बना हुआ है। दिव्य लोक रशियन कैंप के आंगन में एक रंगोली भी बनाई गई है, जो रूसियों ने खुद बनाई है।
इसी कैंप में रूसी नागरिकों के लिए एक छोटा सा रेस्टोरेंट भी है। कैंप में ही नोटिस बोर्ड लगा हुए है, जिस पर चस्पा कागजों पर कुछ लिखा हुआ है और उसकी भाषा रूसी है। कुंभ मेला में पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए यह कैंप किसी अजूबे से कम नहीं है। बताया जा रहा है कि इस शिविर में कुल एक हजार रूसी नागरिकों के ठहरने की व्यवस्था की गई है, जो पायलट बाबा के शिष्य हैं।