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दूसरी पत्नी का पुत्र अनुकंपा नियुक्ति का हकदार
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 02 Jan 2018 01:15 AM IST
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हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारी की दूसरी पत्नी का पुत्र वैध संतान है और उसे मृतक आश्रित कोटे के तहत अनुकंपा नियुक्ति पाने का अधिकार है। कोर्ट ने पुलिस स्थापना बोर्ड को निर्देश दिया है कि याची की नियुक्ति पर पुराने नियम (2015 से पूर्व) के तहत विचार कर निर्णय लिया जाए। मैनपुरी के आलोक कुमार की याचिका पर न्यायमूर्ति आरएसआर मौर्या ने सुनवाई की।
याची के अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि याची के पिता पुलिस विभाग में कांस्टेबल थे। चार जनवरी 2010 को उनकी मृत्यु हो गई। उनकी पत्नी मालती देवी और दूसरी पत्नी साधना देवी हैं। याची साधना देवी का पुत्र है। सभी एक साथ रहते हैं और याची के आवेदन पर परिवार के किसी भी व्यक्ति को आपत्ति नहीं है। उसने मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति हेतु प्रत्यावेदन दिया था मगर विभाग ने दूसरी पत्नी के अवैध होने के कारण उसकी संतान को नियुक्ति देने से इंकार कर दिया। जबकि मद्रास हाईकोर्ट ने यूनियन ऑफ इंडिया बनाम करुमबाई केस में कहा है कि दूसरी पत्नी की संतान को वैध माना जाएगा। इस आदेश को सुप्रीमकोर्ट ने भी सत्यापित कर दिया है।
याची का प्रत्यावेदन लंबित रहने के दौरान प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश सब इंस्पेक्टर एवं इंस्पेक्टर सर्विस रूल्स 2015 लागू कर दिया जिसमें अनुकंपा नियुक्ति को सीमित कर दिया गया है। चूंकि याची ने नई नियमावली लागू होने से पूर्व प्रत्यावेदन दिया था इसलिए विक्रांत तोमर केस में हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा दिए आदेश के तहत उसे पुराने नियम से नियुक्ति पाने का अधिकार है। कोर्ट ने याची के प्रत्यावेदन पर पुराने नियम के तहत उसे अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया है।
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याची के अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि याची के पिता पुलिस विभाग में कांस्टेबल थे। चार जनवरी 2010 को उनकी मृत्यु हो गई। उनकी पत्नी मालती देवी और दूसरी पत्नी साधना देवी हैं। याची साधना देवी का पुत्र है। सभी एक साथ रहते हैं और याची के आवेदन पर परिवार के किसी भी व्यक्ति को आपत्ति नहीं है। उसने मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति हेतु प्रत्यावेदन दिया था मगर विभाग ने दूसरी पत्नी के अवैध होने के कारण उसकी संतान को नियुक्ति देने से इंकार कर दिया। जबकि मद्रास हाईकोर्ट ने यूनियन ऑफ इंडिया बनाम करुमबाई केस में कहा है कि दूसरी पत्नी की संतान को वैध माना जाएगा। इस आदेश को सुप्रीमकोर्ट ने भी सत्यापित कर दिया है।
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याची का प्रत्यावेदन लंबित रहने के दौरान प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश सब इंस्पेक्टर एवं इंस्पेक्टर सर्विस रूल्स 2015 लागू कर दिया जिसमें अनुकंपा नियुक्ति को सीमित कर दिया गया है। चूंकि याची ने नई नियमावली लागू होने से पूर्व प्रत्यावेदन दिया था इसलिए विक्रांत तोमर केस में हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा दिए आदेश के तहत उसे पुराने नियम से नियुक्ति पाने का अधिकार है। कोर्ट ने याची के प्रत्यावेदन पर पुराने नियम के तहत उसे अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया है।
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