Magh Mela : द्वारका शारदा पीठ के भूमि आवंटन पर दूसरे दौर की वार्ता बेनतीजा, दूसरी भूमि खोजने में जुटे अधिकारी
त्रिवेणी मार्ग पर ज्योतिष्पीठ और द्वारका शारदा पीठ के लिए दो सौ फीट लंबी और चार सौ मीटर चौड़ी भूमि आवंटित कर दी गई। मेलाधिकारी के साथ मनकामेश्वर पहुंचे अपर मेलाधिकारी विवेक चतुर्वेदी और एसडीएम मेला विवेक शुक्ला ने शंकराचार्य के प्रतिनिधि ब्रह्मचारी श्रीधरानंद और अन्य संतों को समझाने की कोशिश की।
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द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती के शिविर के लिए भूमि आवंटन पर बृहस्पतिवार को दूसरे दौर की भी वार्ता बेनतीजा रही। मेलाधिकारी दयानंद प्रसाद अफसरों के साथ देर रात मनकामेश्वर पहुंचे। वहां संतों के साथ घंटे भर विवादों का हल निकालने की कोशिश की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। विकल्प के तौर पर दूसरी जगह भी शंकराचार्य के लिए भूमि की तलाश शुरू कर दी गई है।
त्रिवेणी मार्ग पर ज्योतिष्पीठ और द्वारका शारदा पीठ के लिए दो सौ फीट लंबी और चार सौ मीटर चौड़ी भूमि आवंटित कर दी गई। मेलाधिकारी के साथ मनकामेश्वर पहुंचे अपर मेलाधिकारी विवेक चतुर्वेदी और एसडीएम मेला विवेक शुक्ला ने शंकराचार्य के प्रतिनिधि ब्रह्मचारी श्रीधरानंद और अन्य संतों को समझाने की कोशिश की। अफसरों ने बताया कि जितनी जमीन दोनों पीठों को त्रिवेणी मार्ग पर मिलती रही है, कागज के अनुसार उतनी भूमि आवंटित कर दी गई है।
संतों का कहना था कि द्वारका पीठ को भी ज्योतिष्पीठ के बराबर भूमि मिलनी चाहिए। द्वारका पीठ को 160 फीट लंबी और दो सौ फीट चौड़ी भूमि मिलती रही है। द्वारका पीठ के संतों का कहना है कि शंकराचार्य के दर्शन के लिए उनके शिष्य और अनुयायियों की भीड़ आती है। उनके ठहरने और सत्संग, पूजा में भाग लेने के लिए अतिरिक्त भूमि की जरूरत होगी। ऐसे में अन्य स्थान पर भी भूमि के विकल्पों की तलाश की जानी चाहिए।
मेलाधिकारी ने संतों को भरोसा दिलाया कि वह दो दिन के भीतर इसका समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। कुंभमेलाधिकारी विजय किरन आनंद के मुख्य सचिव की बैठक में लखनऊ जाने की वजह से भी अभी अफसर द्वारका पीठ को लेकर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं। उनके आने के बाद इसका समाधान निकाले जाने की उम्मीद है। उधर, श्रीधरानंद ने दोहराया कि जबतक ज्योतिष्पीठ के बराबर भूमि आवंटित नहीं होगी, वह मेले में शिविर के पूजन के लिए प्रवेश नहीं करेंगे।
कोट
द्वारका पीठ को जितनी जमीन दी जाती रही है, उतनी आवंटित कर दी गई है। इससे अभी पीठ के संत संतुष्ट नहीं है। इसलिए दूसरे विकल्पों की भी तलाश की जा रही है। दयानंद प्रसाद, प्रभारी मेलाधिकारी, माघ मेला।
द्वारका पीठ के शिविर को दूसरी जगह बसाना उचित नहीं: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बृहस्पतिवार को कहा कि माघ मेला में द्वारिका -शारदापीठ के शंकराचार्य के शिविर को त्रिवेणी मार्ग से अन्यत्र नहीं हटाया जाना चाहिए। उनके शिविर प्रभारी को मेला प्रशासन कहीं नागवासुकि तो कहीं संगमम लोअर पर भूमि दिखा रहा है। यह उचित नहीं है। शंकराचार्य ने बताया कि उनके गुरु ब्रह्मलीन ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका-शारदापीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती 1982 से माघ मेला में आते रहे हैं। द्वारका-शारदापीठ का शिविर त्रिवेणी मार्ग पर उसी समय लगता आ रहा है। शंकराचार्य ही मेला की शोभा रहते हैं। मेला प्रशासन को यद्वारका पीठ शिविर को सम्मानजनक भूमि और उचित सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। उनके शिविर को अन्यत्र नहीं ले जाना चाहिए।