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झटका : हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की दूसरी याचिका भी खारिज

Sat, 18 Dec 2021 10:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 18 Dec 2021 10:49 PM IST
सार

कर निर्धारण वर्ष 2016-17 मेें हुई आय के मामले में दाखिल पुनर्विचार अर्जी पर सुनवाई कर रहा था आयकर विभाग, कर निर्धारण वर्ष 2017-18 की अर्जी को पहले ही कर चुका है खारिज

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Second petition of High Court Bar Association also dismissed
कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।) - फोटो : iStock

विस्तार

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को आयकर विभाग से दूसरे दिन एक और झटका मिला है। आयकर विभाग ने बार एसोसिएशन के कर निर्धारण वर्ष 2016-17 के आय पर स्रोतों का आंकलन करते हुए उसकी ओर से दाखिल अर्जी को खारिज कर दिया है। विभाग ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से कहा है कि उसे कर निर्धारण वर्ष 2016-17 में भी अपने आय पर टैक्स को जमा करना होगा। जो टैक्स के साथ ब्यॉज सहित तकरीबन 22 लाख रुपये से अधिक होगा।

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आयकर विभाग ने शुक्रवार हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की वित्त वर्ष 2017-18 की पुनरीक्षण अर्जी खारिज कर दी थी और बार एसोसिएशन को तकरीबन 40 लाख रुपये कर जमा करने का आदेश दिया है। शुक्रवार को आए आदेश के बाद शनिवार को विभाग ने कर निर्धारण वर्ष 2016-17 की पुनरीक्षण अर्जी को भी खारिज कर दिया।
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आयकर विभाग ने कहा है कि जब प्रधान आयकर आयुक्त ने कर निर्धारण वर्ष 2017-18 के मामले में पहले ही अर्जी खारिज कर दी है तो कर निर्धारण वर्ष 2016-17 की पुनरीक्षण अर्जी पोषणीय नहीं है। विभाग अपने इस आदेश के बाद विभाग कर निर्धारण वर्ष 2017-18 के लिए 40 लाख रुपये टैक्स वसूलेगा ही कर निर्धारण वर्ष 2016-17 के लिए भी तकरीबन 13 लाख रुपये टैक्स और इतने दिनों का ब्यॉज वसूलेगा। यह कुल मिलाकर 22 लाख रुपये से अधिक होग रहा है।
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विभाग ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के आय पर स्रोतों के दिए गए तर्कों को नहीं माना और याचिका को गुण दोष की बजाय पोषणीयता के आधार पर खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से तर्क दिया गया था कि वह अपने सदस्यों केशुल्क से कल्याण योजनाओं का संचालन करती है, जो आयकर के दायरे में नहीं आती है। लेकिन विभाग ने इसे नहीं माना और पुनरीक्षण अर्जी को खारिज कर दिया।


तर्क दिया गया कि मामले में प्रधान आयकर आयुक्त के द्वारा इसी तरह के मामले की पुनरीक्षण अर्जी को खारिज किया जा चुका है। इसलिए उसी तरह के मामले में दो अलग फैसले नहीं दिए जा सकते हैं। मामले में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से पैरवी कर रहे कर सलाहकार पवन जायसवाल ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।

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