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विज्ञान समागम में ‘नोबेल’ समेत जुटेंगे 300 वैज्ञानिक
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 06 Dec 2014 12:38 AM IST
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इलाहाबाद। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) में पांच दिवसीय सातवां विज्ञान समागम आठ दिसंबर से शुरू होगा। इसमें केमेस्ट्री में नोबेल पुरस्कार विजेजा प्रो. रॉबर्ट कर्ल, क्यूरिन विजेता प्रो. जे. सिफाकिस समेत पूरी दुनिया के तकरीबन 300 प्रख्यात वैज्ञानिक शामिल होंगे।
इस समागम में इंस्पायर योजना के तहत चयनित ग्यारहवीं के 400 छात्र-छात्राओं समेत देश-विदेश के 1400 विद्यार्थियों को इन वैज्ञानिकों को सुनने और जानने का मौका मिलेगा। साथ ही हर रोज छात्र-छात्राएं भारतीय सांस्कृतिक की विरासत से रूबरू होंगे। हालांकि, पिछले वर्षों की तुलना में इस बार नोबेल वैज्ञानिकों की संख्या घट गई है। पिछले साल सात नोबेल वैज्ञानिक इस समागम में शामिल हुए थे।
निदेशक प्रो. सोमनाथ विश्वास ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता में बताया कि विज्ञान समागम की थीम ‘इनोवेशन’ है। आयोजन का मकसद छात्र-छात्राओं को विज्ञान के प्रति प्रेरित करना है। बताया कि इसमें कोलंबस के अनीस अरोरा, लूसियाना विश्वविद्यालय के डॉ. अशोक श्रीवास्तव, लीना निलसन, एचआरआई के प्रो. अशोक सेन, जापान के कुनिहारू टाकई, जयंत विष्णु नार्लिकर आदि वैज्ञानिक शामिल होंगे। समय रहते कैंसर की पहचान का टूल बनाने वाली तथा यूके यंग साइंटिस्ट चुनी गईं जुड़वा बहनों अमीता और अनीता कुमार भी कार्यक्रम में शामिल होंगी। समागम में देश के विद्यार्थियों के अलावा पाकिस्तान, श्रीलंका, ताइवान, बंगलादेश, कोरिया आदि देश के छात्र-छात्राएं और शिक्षक भी शामिल होंगे। वैज्ञानिकों की संख्या कम होने के सवाल पर प्रो. विश्वास का कहना था कि कार्यक्रम के लिए देर से अनुमति मिली। इसके अलावा छह नोबेल वैज्ञानिकों से वार्ता की गई थी। इनमें से चार ने स्वीकृति भी दे दी थी, लेकिन अगस्त-सितंबर में माहौल ठीक नहीं होने से उन लोगों ने आने में असमर्थता जताई। उन्होंने बताया कि इसके अलावा इस बार युवा वैज्ञानिकों को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों के लेक्चर के अलावा छात्र-छात्राओं के साथ इंट्रैक्शन के सत्र भी होंगे। हर रोज सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन होगा। इस बार विद्यार्थियों को भारत की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का मौका मिलेगा। क्लासिकल संगीत की महान विभूतियां कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगी। इसमें अरुणा मोहंती, बिंबावती देवी, श्रीजन चटर्जी, शोवाना नारायन आदि नाम प्रमुख हैं।
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ट्रिपलआईटी में होने वाले विज्ञान समागम में इंस्पायर योजना के तहत चयनित 400 विद्यार्थियों का एक विशेष सत्र आयोजित होगा। पहली बार आयोजित इस सत्र में विद्यार्थियों से उनकी परेशानियों के बारे में जानकारी ली जाएगी। साथ ही समाधान के लिए सुझाव भी लिए जाएंगे। इस सत्र में दुनिया भर से जुटे वैज्ञानिक भी मौजूद रहेंगे। निदेशक ने बताया कि पूरी रिपोर्ट मानव संसाधन विकास मंत्रालय, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग आदि विभागों को भेजी जाएगी।
विज्ञान समागम में विद्यार्थियों को वैज्ञानिक बनने की 100 वजहें भी बताई जाएंगी। इस मकसद से आईसीटीपी की ओर से इस संबंध में एक पुस्तक छापी गई है। इसमें कई वैज्ञानिकों के लेख शामिल किए गए हैं। साइंस कान्क्लेव के तहत प्रकाशित यह किताब विद्यार्थियों को वितरित की जाएगी। इस पुस्तक का जल्द ही हिन्दी अनुवाद किया जाएगा।
ट्रिपल आईटी में सात वर्षों से आयोजित विज्ञान समागम के सफर पर ब्रेक लगने की आशंका बन गई है। आगामी सत्र से इस आयोजन का अधिकार किसी और को मिल सकता है। निदेशक प्रोफसर सोमनाथ विश्वास ने बताया कि आयोजन का मकसद छात्र-छात्राओं को विज्ञान में रिसर्च के लिए प्रेरित करना है। इसलिए क्रमवार पूरे देश की शिक्षण संस्थाओं में यह समागम आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि इस साल भी प्रो. जीसी नंदी के प्रयास की वजह से हो पाया। अन्यथा, आईआईटी कानपुर समेत कई अन्य संस्थान इसके लिए प्रयासरत थे। उन्होंने कहा कि इस दौड़ में विश्वविद्यालय भी शामिल हो सकते हैं।
ट्रिपलआईटी के छात्रों के खाते में एक और उपलब्धि आई है। संस्थान के पुराछात्र प्रत्यूष पटनायक का ‘प्यूरीफायर’ नामक मोबाइल ऐप्प गूगल ने खरीदा है। संस्थान से 2005 में बीटेक प्रत्यूष का यह ऐप्प मोबाइल में वाइरस का स्कैन उन्हें खत्म कर देता है।
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इस समागम में इंस्पायर योजना के तहत चयनित ग्यारहवीं के 400 छात्र-छात्राओं समेत देश-विदेश के 1400 विद्यार्थियों को इन वैज्ञानिकों को सुनने और जानने का मौका मिलेगा। साथ ही हर रोज छात्र-छात्राएं भारतीय सांस्कृतिक की विरासत से रूबरू होंगे। हालांकि, पिछले वर्षों की तुलना में इस बार नोबेल वैज्ञानिकों की संख्या घट गई है। पिछले साल सात नोबेल वैज्ञानिक इस समागम में शामिल हुए थे।
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निदेशक प्रो. सोमनाथ विश्वास ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता में बताया कि विज्ञान समागम की थीम ‘इनोवेशन’ है। आयोजन का मकसद छात्र-छात्राओं को विज्ञान के प्रति प्रेरित करना है। बताया कि इसमें कोलंबस के अनीस अरोरा, लूसियाना विश्वविद्यालय के डॉ. अशोक श्रीवास्तव, लीना निलसन, एचआरआई के प्रो. अशोक सेन, जापान के कुनिहारू टाकई, जयंत विष्णु नार्लिकर आदि वैज्ञानिक शामिल होंगे। समय रहते कैंसर की पहचान का टूल बनाने वाली तथा यूके यंग साइंटिस्ट चुनी गईं जुड़वा बहनों अमीता और अनीता कुमार भी कार्यक्रम में शामिल होंगी। समागम में देश के विद्यार्थियों के अलावा पाकिस्तान, श्रीलंका, ताइवान, बंगलादेश, कोरिया आदि देश के छात्र-छात्राएं और शिक्षक भी शामिल होंगे। वैज्ञानिकों की संख्या कम होने के सवाल पर प्रो. विश्वास का कहना था कि कार्यक्रम के लिए देर से अनुमति मिली। इसके अलावा छह नोबेल वैज्ञानिकों से वार्ता की गई थी। इनमें से चार ने स्वीकृति भी दे दी थी, लेकिन अगस्त-सितंबर में माहौल ठीक नहीं होने से उन लोगों ने आने में असमर्थता जताई। उन्होंने बताया कि इसके अलावा इस बार युवा वैज्ञानिकों को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों के लेक्चर के अलावा छात्र-छात्राओं के साथ इंट्रैक्शन के सत्र भी होंगे। हर रोज सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन होगा। इस बार विद्यार्थियों को भारत की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का मौका मिलेगा। क्लासिकल संगीत की महान विभूतियां कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगी। इसमें अरुणा मोहंती, बिंबावती देवी, श्रीजन चटर्जी, शोवाना नारायन आदि नाम प्रमुख हैं।
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ट्रिपलआईटी में होने वाले विज्ञान समागम में इंस्पायर योजना के तहत चयनित 400 विद्यार्थियों का एक विशेष सत्र आयोजित होगा। पहली बार आयोजित इस सत्र में विद्यार्थियों से उनकी परेशानियों के बारे में जानकारी ली जाएगी। साथ ही समाधान के लिए सुझाव भी लिए जाएंगे। इस सत्र में दुनिया भर से जुटे वैज्ञानिक भी मौजूद रहेंगे। निदेशक ने बताया कि पूरी रिपोर्ट मानव संसाधन विकास मंत्रालय, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग आदि विभागों को भेजी जाएगी।
विज्ञान समागम में विद्यार्थियों को वैज्ञानिक बनने की 100 वजहें भी बताई जाएंगी। इस मकसद से आईसीटीपी की ओर से इस संबंध में एक पुस्तक छापी गई है। इसमें कई वैज्ञानिकों के लेख शामिल किए गए हैं। साइंस कान्क्लेव के तहत प्रकाशित यह किताब विद्यार्थियों को वितरित की जाएगी। इस पुस्तक का जल्द ही हिन्दी अनुवाद किया जाएगा।
ट्रिपल आईटी में सात वर्षों से आयोजित विज्ञान समागम के सफर पर ब्रेक लगने की आशंका बन गई है। आगामी सत्र से इस आयोजन का अधिकार किसी और को मिल सकता है। निदेशक प्रोफसर सोमनाथ विश्वास ने बताया कि आयोजन का मकसद छात्र-छात्राओं को विज्ञान में रिसर्च के लिए प्रेरित करना है। इसलिए क्रमवार पूरे देश की शिक्षण संस्थाओं में यह समागम आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि इस साल भी प्रो. जीसी नंदी के प्रयास की वजह से हो पाया। अन्यथा, आईआईटी कानपुर समेत कई अन्य संस्थान इसके लिए प्रयासरत थे। उन्होंने कहा कि इस दौड़ में विश्वविद्यालय भी शामिल हो सकते हैं।
ट्रिपलआईटी के छात्रों के खाते में एक और उपलब्धि आई है। संस्थान के पुराछात्र प्रत्यूष पटनायक का ‘प्यूरीफायर’ नामक मोबाइल ऐप्प गूगल ने खरीदा है। संस्थान से 2005 में बीटेक प्रत्यूष का यह ऐप्प मोबाइल में वाइरस का स्कैन उन्हें खत्म कर देता है।