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विज्ञान के क्षेत्र में प्रयागराज की बेटियों ने गढ़े कीर्तिमान

Sat, 29 Feb 2020 12:25 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 29 Feb 2020 12:25 AM IST
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science day celebrated at Vigyan Parishad in Prayagraj
science day celebrated at Vigyan Parishad in Prayagraj - फोटो : ALDCOMPACT
घर से निकलकर अब समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून
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प्रयागराज। विज्ञान के क्षेत्र में बेटियां आए दिन नए कीर्तिमान गढ़ रही हैं। रिसर्च के क्षेत्र में ‘आधी आबादी’ की अब आधी हिस्सेदारी भी हो चुकी है। ऐसे में विज्ञान दिवस पर समाज के लिए कुछ कर गुजरने के जुनून में वैज्ञानिक खोजों में जुटीं प्रयागराज की बेटियों का उल्लेख करना लाजिमी है। स्कूल से लेकर महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों तक रिसर्च के क्षेत्र में छात्राएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ही बात करें तो एक दशक पहले जहां रिसर्च के क्षेत्र में बेटियों की हिस्सेदारी 25 से 30 फीसदी थी, वे बराबरी पर खड़ी हैं और अब घर से निकलकर समाज के लिए भी कुछ कर गुजरने का उनमें जुनून है।
नदियों की जैव विविधित बचाने में जुटीं डॉ. ज्योति
सीएमपी डिग्री कॉलेज में जंतु विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ज्योति वर्मा को यूजीसी की स्कीम के तहत स्टार्ट अप ग्रांट मिला है। स्टार्ट अप ग्रांट पाने वाली वह इविवि के संघटक कॉलेजों में कॉलेजों में पहली महिला शिक्षक हैं। वह जैव विविधता बचाने पर शोध कर रही हैं। दरअसल, केंद्र सरकार की केन और बेतवा नदी को जोड़ने की योजना है लेकिन इससे पहले सरकार यह जानना चाहती है कि कहीं इस कार्य से जैव विविधता पर संकट न आ जाए। यही जानने के लिए डॉ. ज्योति शोध कर रही हैं। इसके प्रभाव क्षेत्र में मध्य प्रदेश का पन्ना टाइगर रिजर्व भी आ रहा है, क्योंकि वहां से भी केन नदी गुजरती है। ऐसे में डॉ. ज्योति का यह शोध जैव विविधता के लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। डॉ. ज्योति को पिछले दिनों जर्मनी के बर्लिन में आयोजित कांफ्रेंस में ‘बेस्ट यंग साइंटिस्ट’ का अवार्ड भी मिल चुका है।
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इंसुलिन का इनहेलर तैयार कर रहीं प्रीति
इंसुलिन का इंजक्शन लगाने वाले डायबिटीज के मरीजों के लिए यह राहत वाली खबर है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सेंटर ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की शोध छात्रा प्रीति यादव इंसुलिन का इनहेलर तैयार करने पर शोध कर रही हैं। इसका फॉर्मुलेशन बन चुका है और अब चूहे पर इसका प्रयोग किया जाना है। प्रीति चार साल से इस पर शोध कर रही हैं। अगर चूहे पर यह प्रयोग सफल रहा तो इसके बाद क्लीनिकल ट्रायल किया जाएगा। अब तक इंसुलिन इंजेक्शन से लगाई जाती है, जिसके कई साइड इफेक्ट भी हैं। बार-बार एक ही जगह इंसुलिन का इंजेक्शन लगाने से शरीर पर गांठ पड़ जाती है। इंजक्शन लगाना पीड़ादायक भी होता है। मरीज को भी बार-बार डॉक्टर के पास दौड़कर जाना पड़ता है। इंसुलिन का इनहेलर तैयार होने से मरीजों को इन दिक्कतों से राहत मिलेगी। मरीज इंसुलिन को इनहेल (सूंघकर) कर फिट रह सकेंगे।
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शोध से ब्रेस्ट कैंसर का इलाज खोज रहीं प्रियंका
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बायोकेमेस्ट्री की शोध छात्रा प्रियंका गौतम ब्रेस्ट कैंसर के जीन की पहचान करने में जुटी हैं। वह साल भर से इस पर शोधा कर रही हैं। प्रियंका के मुताबिक सर्वाइकल कैंसर के बाद सर्वाधिक मामले ब्रेस्ट कैंसर के आते हैं। प्रत्येक आठ महिलाओं में एक को ब्रेस्ट कैंसर की शिकायत सामने आ रही है। ब्रेस्ट कैंसर के पीछे पारिवारिक इतिहास, डाइट (खानपान) जैसे कई कारण हैं। ब्रेस्ट कैंसर की जेनेटिक वजह भी है। शोध में वह सामान्य और कैंसर पीड़ित महिला के बीच तुलनात्मक अध्ययन कर रही हैं, ताकि पता लगाया जा सके कि कौन से जीन इस बीमारी के प्रमुख कारण है। जीन की पहचान के बाद उनसे निपटने के लिए इलाज की खोज शुरू की जाएगी।

आठवीं की छात्रा अन्वेषा ने डायपर से बनाई खाद
जिस उम्र में बच्चे डायपर पहनते हैं, उनसे कुछ वर्षों बड़ी टैगोर पब्लिक स्कूल की आठवीं की छात्रा अन्वेषा श्रीवास्तव ने डायपर से खाद बनाने की अनूठी खोज की। अन्वेषा की यह रोचक और उपयोगी खोज इन दिनों चर्चा का विषय है। अन्वेषा ने पिछले दिनों त्रिवेंद्रम में आयोजित राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में भागीदारी की और अपना यह प्रयोग प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने अन्वेषा को उनकी खोज के लिए सम्मानित किया। डायपर से बनाई गई खाद पौधों के लिए काफी फायदेमंद है और अन्वेषा ने इसका सफल प्रयोग भी किया है। सिर्फ यही नहीं, अन्वेषा ने डायपर से बच्चों को होने वाले नुकसान पर भी शोध किया और नतीजा सामने आया कि लगातार डायपर पहचाने से बच्चों की चाल जीवन भर के लिए खराब हो जाती है।
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