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कुंभ में 118 करोड़ के स्लीपर की आपूर्ति में घोटाला, जांच शुरू

Mon, 28 Sep 2020 10:38 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 28 Sep 2020 10:38 AM IST
सार

यह था मामला
कुंभ 2018-19 के दौरान पीपा पुल बनाने के लिए टेंडर मांगे गए थे। पहले इसमें अकेले अरुणाचल वन कॉरपोरेशन निगम ने हिस्सा लिया। इसलिए उसे टेंडर आवंटित कर दिया गया था। लेकिन इसी दौरान पंजाब वन विकास निगम भी इसमें शामिल हो गया। उसे 118 करोड़ रुपये में 1000 क्यूबिक मीटर स्लीपर की सप्लाई करनी थी। पंजाब वन निगम ने पीडब्ल्यूडी को मानक के विपरीत अपनी शर्तों पर घटिया स्तर का स्लीपर जुलाई में सप्लाई कर दी। मामले में पंजाब में सप्लाई में शामिल दो वन अधिकारियों के साथ कई कर्मचारियों की भूमिका की जांच चल रही है। यहां भी जांच शुरू हो गई है।

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Scam in supply of 118 crore sleepers in Kumbh, investigation begins
पीपा पुल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिछले साल आयोजित हुए कुंभ मेले में हुईं गड़बड़ियों से पर्दा उठने लगा है। ताजा मामला पीडब्ल्यूडी से जुड़ा है। पीपा पुल (पांटून) और घाट बनाने के लिए 118 करोड़ के पंजाब वन विकास निगम ने घटिया स्तर की साल की लकड़ी से बने स्लीपर की आपूर्ति की थी। घपलेबाजी का मामला पीएमओ ऑफिस, सीबीआई से होते हुए पंजाब विजिलेंस ब्यूरो तक पहुंचा है, जोकि प्रकरण की जांच कर रही है। यहां भी मामले की शिकायत हुई तो शासन ने मुख्य अभियंता को पत्र भेजकर रिपोर्ट मांगी है। मुख्य अभियंता ने यह जांच अधीक्षण अभियंता को सौंपी है।  
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मुख्य अभियंता हिमांशु मित्तल की ओर से जारी पत्र में शिकायत कर्ता दिलीप कुमार शर्मा के पत्रों के आधार पर कुंभ मेला 2018-19 में करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने, घटिया किस्म की सामग्री की आपूर्ति लेने तथा भ्रष्टाचार में एक अवर अभियंता के खिलाफ जांच कर 15 दिन में अधीक्षण अभियंता को रिपोर्ट देने को कहा गया है। 
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घोटाले में जुड़ रहे कई अभियंताओं के नाम

स्लीपर आपूर्ति घोटाले के तार अवर अभियंता से लेकर अधिशासी अभियंता तक जुड़े हैं। सभी से पूछताछ हो रही है। बताया जा रहा है कि जब पंजाब वन विकास निगम की ओर से स्लीपर की सप्लाई की गई तो जितने का आर्डर हुआ था उतना स्लीपर आया नहीं। स्लीपर उतारने और उसे निश्चित स्थान में रखने का काम 20 दिन में ही पूरा कर लिया गया जबकि यह काम दो महीने का है। इसके साथ ही जिस अवर अभियंता की ड्यूटी लगाई गई थी उसकी जगह पर जब पंजाब से स्लीपर गाड़ियों से लाए गए तो दूसरे अवर अभियंता तैनात कर दिए गए। इसके चलते इसमें घोटाले, अनियमितता और गड़बड़ियों की बात कही जा रही है।
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