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एसआरएन अस्पताल में कदम-कदम ‘कानपुर’
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 02 Sep 2016 02:55 AM IST
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इलाहाबाद। मंडल के सबसे बड़े स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय के मेडिसिन आईसीयू के गलियारे में दोपहर 12.30 बज रहे होंगे। मध्यप्रदेश केरीवा से आईं गुड़िया गुप्ता आईसीयू की तरफ जा रहीं थीं। उनकी हालत खराब थी। इमरजेंसी में उन्हें स्ट्रेचर नहीं मिला तो वह अपने पति और बेटे के कंधे पर थी। वह आईसीयू में गईं, वहां मौजूद जूनियर डॉक्टर ने उन्हें सीनियर कंसलटेंट डॉ. मनोज माथुर की ओपीडी में भेज दिया। गुड़िया अपने पति और बेटे के कंधे पर ही लदे हुए सीढ़ियों से नीचे डॉ. माथुर की ओपीडी में किसी तरह से पहुंची। उनके पति ने बताया कि उन्होंने स्ट्रेचर मांगा था लेकिन मिला नहीं।
एसआरएन चिकित्सालय में ऐसा गुड़िया देवी के साथ ही नहीं होता। ओपीडी, इमरजेंसी, आईसीयू, लेबररूम, वार्डों में भर्ती मरीजों को अक्सर ही उनकी जरूरत पर स्ट्रेचर नहीं मिल पाता है। चिकित्सालय परिसर में पांच मिनट टहलकर कानपुर के हैलट अस्पताल में दो दिन पूर्व घटी घटना की तरह कई उदाहरण देखे जा सकते हैं। कानपुर में पिता अपने बीमार बच्चे को कंधे पर लेकर टहलता रहा गया और उसके बच्चे की मौत हो गई। बच्चे को स्ट्रचेर तक नहीं मिला और उसका उपचार भी नहीं हो सका। बृहस्पतिवार को चिकित्सालय परिसर में टहला गया तो कई ऐसे मरीज दिखे जो जिनके परिजनों का कंधा ही स्ट्रेचर ही बना रहा। चिकित्सालय के पुरानी बिल्डिंग में सर्जरी वार्ड के बेड नंबर 35 में भर्ती मरीज गीता देवी गलियारे से जांच कराने जा रहीं थीं। उनके पेट में बेल्ट बंधी हुई थी। उनको चलने में दिक्कत हो रही थी। उन्होंने स्ट्रेचर न मिलने की बात कही। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह कहते हैं कि उन्होंने इमरजेंसी, आईसीयू के साथ सभी वार्डों में स्ट्रेचर रखवाया है। कई बार ऐसा होता है मरीज मांगते ही नहीं इसके चलते उन्हें नहीं मिल पाता। कई बार ज्यादा मरीजों की जरूरत पड़ जाती है। इसके चलते समस्या खड़ी होती है।
पैसा खतम हो गया तो मरीज को उठा ले गए घर
जिला खागा के गांव कबरे, पोष्ट बरएपुर से आए मिट्ठू (35) को उसके परिवार वाले घर उठा ले गए। वह सर्जरी विभाग की इमरजेंसी में भर्ती था। परिवार के लोग स्ट्रेचर नहीं मिला तो घर वाले उसे वार्ड से बाहर चद्दर पर लिटाकर ले आए। उसके घर वालों ने बताया कि मिट्ठू को बुधवार से भर्ती किया है लेकिन आराम नहीं मिला तो अब घर ले जा रहे हैं। उनके पास इलाज कराने के लिए पैसे भी नहीं रह गए हैं। जितना पैसा ले आए थे, वो खतम हो गया है। अब वह उपचार नहीं करा सकते हैं। घर ले जाएंगे जड़ी-बूटियों से उसका उपचार करेंगे। मिट्ठू को पॉलिस मार गई है।
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एसआरएन चिकित्सालय में ऐसा गुड़िया देवी के साथ ही नहीं होता। ओपीडी, इमरजेंसी, आईसीयू, लेबररूम, वार्डों में भर्ती मरीजों को अक्सर ही उनकी जरूरत पर स्ट्रेचर नहीं मिल पाता है। चिकित्सालय परिसर में पांच मिनट टहलकर कानपुर के हैलट अस्पताल में दो दिन पूर्व घटी घटना की तरह कई उदाहरण देखे जा सकते हैं। कानपुर में पिता अपने बीमार बच्चे को कंधे पर लेकर टहलता रहा गया और उसके बच्चे की मौत हो गई। बच्चे को स्ट्रचेर तक नहीं मिला और उसका उपचार भी नहीं हो सका। बृहस्पतिवार को चिकित्सालय परिसर में टहला गया तो कई ऐसे मरीज दिखे जो जिनके परिजनों का कंधा ही स्ट्रेचर ही बना रहा। चिकित्सालय के पुरानी बिल्डिंग में सर्जरी वार्ड के बेड नंबर 35 में भर्ती मरीज गीता देवी गलियारे से जांच कराने जा रहीं थीं। उनके पेट में बेल्ट बंधी हुई थी। उनको चलने में दिक्कत हो रही थी। उन्होंने स्ट्रेचर न मिलने की बात कही। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह कहते हैं कि उन्होंने इमरजेंसी, आईसीयू के साथ सभी वार्डों में स्ट्रेचर रखवाया है। कई बार ऐसा होता है मरीज मांगते ही नहीं इसके चलते उन्हें नहीं मिल पाता। कई बार ज्यादा मरीजों की जरूरत पड़ जाती है। इसके चलते समस्या खड़ी होती है।
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पैसा खतम हो गया तो मरीज को उठा ले गए घर
जिला खागा के गांव कबरे, पोष्ट बरएपुर से आए मिट्ठू (35) को उसके परिवार वाले घर उठा ले गए। वह सर्जरी विभाग की इमरजेंसी में भर्ती था। परिवार के लोग स्ट्रेचर नहीं मिला तो घर वाले उसे वार्ड से बाहर चद्दर पर लिटाकर ले आए। उसके घर वालों ने बताया कि मिट्ठू को बुधवार से भर्ती किया है लेकिन आराम नहीं मिला तो अब घर ले जा रहे हैं। उनके पास इलाज कराने के लिए पैसे भी नहीं रह गए हैं। जितना पैसा ले आए थे, वो खतम हो गया है। अब वह उपचार नहीं करा सकते हैं। घर ले जाएंगे जड़ी-बूटियों से उसका उपचार करेंगे। मिट्ठू को पॉलिस मार गई है।
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