{"_id":"539d396e846a4a214a3691dda71f5fd2","slug":"santoor-been-resonate-wire-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"झंकृत करते रहे संतूर के तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झंकृत करते रहे संतूर के तार
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 09 Oct 2015 01:28 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ फूड टेक्नोलॉजी में बृहस्पतिवार को संतूर के तार झंकृत हुए। अवसर था पद्मश्री और किंग ऑफ स्टिंग्स फेम मशहूर संतूर वादक भजन सोपोरी की प्रस्तुति का। उन्होंने पहले आलाप, फिर जोड़ और फिर बंदिशें पेश कर समां बांधा और फिर एक-एक करके सूफियाना संगीत का हर पहलू सामने आता गया। इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्ट्डीज और स्पिक मैके की पहल पर भजन सोपारी की प्रस्तुतियां हर किसी को मंत्रमुग्ध करती रहीं।
इस दौरान मीडिया स्ट्डीज, फैशन टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर एजुकेशन और फूड टेक्नोलाजी के विद्याथियों ने संतूर वादन की बारीकियां भी सीखीं। उन्होंने सोपोरी के साथ कई बंदिशें गाईं। साथी कलाकारों ने भी सहयोग किया। शुरुआत में मीडिया स्ट्डीज के कोर्स कोआर्डिनेटर धनंजय चोपड़ा ने भजन सोपोरी का परिचय दिया। स्पिक मैके की डॉ.मधु शुक्ला ने कार्यक्रम का संयोजन और इंस्टीट्यूट के ओएसडी प्रो.प्रशांत अग्रवाल ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया। तबले पर कलाकार सचिन शर्मा और सुर संतूर पर वीथिका टिक्कू ने संगत किया। कार्यक्रम में इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो.जीके राय, प्रो.एसके नाहर, प्रो.जयंत खोत, आशा राय, डॉ.बबिता अग्रवाल, प्रो. आरके टंडन, प्रो.प्रमिला टंडन, डॉ.अजय जैतली, प्रधानाचार्य डॉ.अरुण प्रकाश आदि मौजूद थे। इससे पहले सोपोरी ने लारेल्स स्कूल में बच्चों को रागचारुकेशी में गायन की सीख दी।
संगम नगरी एक सांस्कृतिक शहर है। यहां आना हर कलाकार की ख्वाहिश होती है। यहां अपनी कला का प्रदर्शन करके हर कलाकार को सुकून मिलता है। पद्मश्री और किंग ऑफ स्टिंग्स भजन सोपोरी ने खास मुलाकात में संगमनगरी से जुड़ी यादों को साझा किया। कहा, दस वर्ष की उम्र में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रस्तुति देने आया था। सूफीयाना और क्लासिकल मौसिकी में अंतर है। संतूर वादन भारतीय संस्कृति की रगों में बहता है। ऐसे आयोजन होते रहेंगे तो शहर आने का मौका मिलता रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस दौरान मीडिया स्ट्डीज, फैशन टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर एजुकेशन और फूड टेक्नोलाजी के विद्याथियों ने संतूर वादन की बारीकियां भी सीखीं। उन्होंने सोपोरी के साथ कई बंदिशें गाईं। साथी कलाकारों ने भी सहयोग किया। शुरुआत में मीडिया स्ट्डीज के कोर्स कोआर्डिनेटर धनंजय चोपड़ा ने भजन सोपोरी का परिचय दिया। स्पिक मैके की डॉ.मधु शुक्ला ने कार्यक्रम का संयोजन और इंस्टीट्यूट के ओएसडी प्रो.प्रशांत अग्रवाल ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया। तबले पर कलाकार सचिन शर्मा और सुर संतूर पर वीथिका टिक्कू ने संगत किया। कार्यक्रम में इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो.जीके राय, प्रो.एसके नाहर, प्रो.जयंत खोत, आशा राय, डॉ.बबिता अग्रवाल, प्रो. आरके टंडन, प्रो.प्रमिला टंडन, डॉ.अजय जैतली, प्रधानाचार्य डॉ.अरुण प्रकाश आदि मौजूद थे। इससे पहले सोपोरी ने लारेल्स स्कूल में बच्चों को रागचारुकेशी में गायन की सीख दी।
विज्ञापन
संगम नगरी एक सांस्कृतिक शहर है। यहां आना हर कलाकार की ख्वाहिश होती है। यहां अपनी कला का प्रदर्शन करके हर कलाकार को सुकून मिलता है। पद्मश्री और किंग ऑफ स्टिंग्स भजन सोपोरी ने खास मुलाकात में संगमनगरी से जुड़ी यादों को साझा किया। कहा, दस वर्ष की उम्र में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रस्तुति देने आया था। सूफीयाना और क्लासिकल मौसिकी में अंतर है। संतूर वादन भारतीय संस्कृति की रगों में बहता है। ऐसे आयोजन होते रहेंगे तो शहर आने का मौका मिलता रहेगा।
विज्ञापन