UP : सलीम शेरवानी ने सपा महासचिव पद से दिया इस्तीफा, मुस्लिमों का ध्यान नहीं रखने का आरोप
सलीम शेरवानी की गिनती पार्टी के कद्दावर नेताओं में होती रही है। वह बदायूं सीट से पांच बार सांसद रहे चुके हैं। 2019 के चुनाव में सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव के चुनाव हारने के बाद सलीम को उम्मीद थी कि सपा इस बार उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित करेगी, लेकिन अखिलेश यादव ने उस सीट से अपने भाई धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
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स्वामी प्रसाद मौर्य के बाद सलीम इकबाल शेरवानी ने भी समाजवादी के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को पद छोड़े जाने का पत्र रविवार को ही भेजा है। सियासी गलियारे में चर्चा है कि प्रयागराज निवासी सलीम शेरवानी एक बार फिर कांग्रेस ज्वाइन कर सकते हैं। वहीं, कुछ नजदीकी नेताओं ने उनके भाजपा के संपर्क में भी होने की बात कही है।
सलीम शेरवानी की गिनती पार्टी के कद्दावर नेताओं में होती रही है। वह बदायूं सीट से पांच बार सांसद रहे चुके हैं। 2019 के चुनाव में सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव के चुनाव हारने के बाद सलीम को उम्मीद थी कि सपा इस बार उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित करेगी, लेकिन अखिलेश यादव ने उस सीट से अपने भाई धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
हालांकि, इसके बाद राज्यसभा में सलीम शेरवानी को भेजे जाने की चर्चा हुई, लेकिन इस बार भी सपा ने उन्हें तवज्जों नहीं दी। बताया जा रहा है कि इसी बात से नाराज होकर उन्होंने राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया।
जल्ह ही लेंगे बड़ा फैसला
लिखे पत्र में उन्होंने अखिलेश पर मुसलमानों की उपेक्षा का भी आरोप लगाया है। उन्होंने पत्र के माध्यम से कहा है कि वह जल्द ही अपने भविष्य को लेकर बड़ा फैसला लेंगे। पिछले सप्ताह स्वामी प्रसाद मौर्य और अब सलीम शेरवानी के सपा महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद अखिलेश यादव के पीडीए ( पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) मुहिम को झटका लगा है। अखिलेश यादव को लिखे पत्र में सलीम शेरवानी ने कहा कि मैंने हमेशा यह बताने का प्रयास किया है कि मुसलमान उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। पार्टी के साथ उनकी दूरी लगातार बढ़ रही है।
मुसलमानों को एक सच्चे रहनुमा की तलाश है। अभी हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए तीन उम्मीदवार सपा ने घोषित किए, इसमें एक भी मुस्लिम नहीं है। बेशक मेरे नाम पर विचार नहीं होता, लेकिन किसी मुसलमान को तो सीट मिलनी चाहिए थी। मुझे लगता है कि सपा में रहते हुए मैं मुस्लिमों की हालत में बड़ा परिवर्तन नहीं ला सकता हूं।
वर्जनअखिलेश यादव एक ओर पीडीए की बात करते हैं वहीं दूसरी ओर राज्यसभा के लिए जिन तीन नामों की उन्होंने घाेषणा की है, उसमें पीडीए की भागीदारी नहीं दिखाई दे रही है। अभी मैं सपा में हूं। अपने साथियों से बात करने के बाद राजनीतिक भविष्य के बारे में जल्द ही निर्णय लूंगा। - सलीम इकबाल शेरवानी, वरिष्ठ सपा नेता।