प्रयागराज : सफदर अली को नहीं मिला ठिकाना, घर ढहने के बाद किराये के आशियाने की तलाश
माफिया अतीक अहमद से नजदीकी के शक में मकान ध्वस्त किए जाने के बाद गन हाउस मालिक सफदर अली को ठिकाना नहीं मिल पा रहा है। सिर की छत टूटने के बाद इस परिवार को छांव की दरकार है।
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माफिया अतीक अहमद से नजदीकी के शक में मकान ध्वस्त किए जाने के बाद गन हाउस मालिक सफदर अली को ठिकाना नहीं मिल पा रहा है। सिर की छत टूटने के बाद इस परिवार को छांव की दरकार है। चार दिन बाद अभी तक किराये का भी अशियाना नहीं मिल पा रहा है। जान पहचान के लोग भी शरण देने से से हिचक रहे हैं।
गाजीपुर के कासमाबाद के रहने वाले सफदर अली पुलिस और पीडीए की कार्रवाई से भले ही सकते में हैं, लेकिन वह खुद को निर्दोष बता रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद सफदर जानसेनगंज में स्थित अपनी एसएसए गन हाउस पर नियमित बैठ रहे हैं। सफदर के दोनों पुत्रों सैयद कमर अब्बास और सैयद फजल अब्बास के अलावा उनकी शिक्षिका बहू, बेटी सानिया और पोते सलमान और अन्य सदस्यों को अभी तक ठिकाना नहीं मिल सका है।
पुलिस को शक है कि उमेश हत्याकांड में माफिया अतीक अहमद गैंग के शूटरों को सफदर ने ही कारतूस मुहैया कराया था। अतीक अहमद से सफदर के पुराने ताल्लुक भी पुलिस बता रही है। कहा जा रहा है कि अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन के नाम वाले तीन असलहों को जब 2007 में सरेंडर कराया गया था, तब से वह असलहे सफदर के ही गन हाउस में जमा कराए गए हैं। इन्हीं वजहों को लेकर सफदर को अतीक अहमद के करीबी के तौर पर चिह्नित किया गया। इसके बाद उनके साठ फीट रोड स्थित आलीशान भवन पर बुलडोजर चलवा दिया गया।
भवन ध्वस्तीकरण के बाद अभी तक सफदर के परिजनों को कहीं ठिकाना नहीं मिल सका है। साठ फीट रोड के अलावा आसपास के इलाके में उन्हें किराये के घर की तलाश है। फिलहाल उन्हें घर नहीं मिल सका है। ध्वस्तीकरण से पहले पीडीए की ओर से निकलवाए गए घर के गृहस्थी के सामान को सफदर ने अपने के परिचित के हाता में रखवा दिया है। सफदर शनिवार को अपने टूटे घर को लोहे की चादरों से ढंकवाते रहे। उनका कहना है कि फिलहाल वह अपने परिवार के लिए सुरक्षित छत की तलाश कर रहे हैं। रही बात माफिया से ताल्लुक की तो उन्हें इस मामले में फंसाया गया है।
आशियाना छिनने के बाद एक दिन भी बंद नहीं हुआ सफदर का गन हाउस
सफदर अली इस कार्रवाई के बाद जानसेनगंज में एपनी गन हाउस चला रहे हैं। उन पर उमेश पाल हत्याकांड के शूटरों को कारतूस मुहैया कराने का शक है। लेकिन, वह इसे सिरे से नकार रहेे हैं।
शनिवार को भी उनके गन हाउस का ताला रोज की तरह खुला। उन्होंने डिलीवरी भी की। सफदर ने बताया कि जिस दिन ध्वस्तीकरण हुआ था, उसी दिन पुलिस ने उन्हें और उनके बेटों को बुलवा लिया था। उसी दौैरान उनकी शस्त्र की दुकान बंद थी। लेकिन, उसके बाद से लगातार वह अपनी दुकान पर बैठ रहे हैं। इस दिन पत्नी का बल्ड प्रेशर बढ़ने की वजह से चिकित्सक के पास जाने की वजह से दोपहर में कुछ देर के लिए शटर बंद था। लेकिन, दुकान नियमित रूप से खुल रही है और सारे रिकार्ड दुरुस्त हैं।