{"_id":"60d1ff488ebc3ec85e0d6e04","slug":"rudra-builders-proprietor-mukesh-khurana-s-payroll-approved","type":"story","status":"publish","title_hn":"रूद्रा बिल्डर्स के प्रोपराइटर मुकेश खुराना की पेरोल मंजूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रूद्रा बिल्डर्स के प्रोपराइटर मुकेश खुराना की पेरोल मंजूर
Tue, 22 Jun 2021 08:48 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 22 Jun 2021 08:48 PM IST
विज्ञापन
bail
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रुद्रा बिल्डर्स के प्रोपराइटर मुकेश खुराना की 60 दिन के लिए सशर्त शार्ट टर्म जमानत मंजूर कर ली है। साथ ही कहा कि यह अवधि बीतने के बाद उन्हें अदालत में सरेंडर करना होगा। न्यायमूर्ति ओम प्रकाश ने यह आदेश हार्ट व ब्लड प्रेशर की याची की बीमारी और सह अभियुक्त गौतम मेहरा को अंतरिम जमानत मिलने के आधार पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याची अपना पासपोर्ट अदालत में जमा कर देगा और अदालत की अनुमति बगैर देश नहीं छोड़ेगा। इसके अलावा निवेशकों के दावे का निपटारा करेगा।
रुद्रा ग्रुप ऑफ कंपनीज व रुद्रा बिल्डर्स के प्रमोटर खुराना ने 2012 में गाजियाबाद में पावो रियल प्रोजेक्ट शुरू किया। सैकड़ों लोगों से फ्लैट देने के नाम पर योजना में निवेश कराया। जिस जमीन पर बिल्डिंग बननी थी, वह गांवसभा की जमीन थी। नतीजतन न किसी को फ्लैट मिला और न ही पैसा वापस किया गया। लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
गौतमबुद्धनगर के सेक्टर सात के फेज थ्री थाने में एफआईआर दर्ज हुई और याची को जेल भेज दिया गया। जेल में बीमार होने पर सफदरजंग अस्पताल में 45 दिन इलाज के बाद उसे फिर जेल भेज दिया गया। उसके बाद हार्ट अटैक के खतरे को लेकर याची ने सुप्रीम कोर्ट से शार्ट टर्म जमानत की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को अर्जी तय करने को कहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन
रुद्रा ग्रुप ऑफ कंपनीज व रुद्रा बिल्डर्स के प्रमोटर खुराना ने 2012 में गाजियाबाद में पावो रियल प्रोजेक्ट शुरू किया। सैकड़ों लोगों से फ्लैट देने के नाम पर योजना में निवेश कराया। जिस जमीन पर बिल्डिंग बननी थी, वह गांवसभा की जमीन थी। नतीजतन न किसी को फ्लैट मिला और न ही पैसा वापस किया गया। लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
विज्ञापन
गौतमबुद्धनगर के सेक्टर सात के फेज थ्री थाने में एफआईआर दर्ज हुई और याची को जेल भेज दिया गया। जेल में बीमार होने पर सफदरजंग अस्पताल में 45 दिन इलाज के बाद उसे फिर जेल भेज दिया गया। उसके बाद हार्ट अटैक के खतरे को लेकर याची ने सुप्रीम कोर्ट से शार्ट टर्म जमानत की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को अर्जी तय करने को कहा था।
विज्ञापन