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एससीएसटी कर्मचारियों की पदावनति पर से रोक हटी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 20 Aug 2015 01:57 AM IST
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इलाहाबाद(ब्यूरो)। हाईकोर्ट ने प्रोन्नति में आरक्षण का लाभ पाकर प्रोन्नत हुए अनुसूचित जाति-जनजाति के सरकारी कर्मचारियों की पदावनति पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगाने का आदेश हटा लिया है। इसी प्रकरण पर सुप्रीमकोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। इस बात की जानकारी होने पर कोर्ट ने अपने 30 जुलाई के आदेश को स्थगित करते हुए सुप्रीमकोर्ट में मामले का निस्तारण होने के बाद याचिका पर सुनवाई का आदेश दिया है। अनुसूचित जाति जनजाति व पिछड़ावर्ग कल्याण संगठन और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश तिवारी और न्यायमूर्ति मुख्तार अहमद की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है।
याची ने प्रोन्नति में आरक्षण पाकर ज्येष्ठता के आधार पर लाभान्वित कर्मचारियों को पदावनत करने की प्रदेश सरकार की नीति को चुनौती दी है। कहा गया कि तमाम सरकारी विभागों में इस अनुसूचित जाति-जनजाति का प्रतिनिधित्व अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इसके लिए एक आयोग बनाने की मांग की गई है जो सभी सरकारी विभागों में सर्वे करके जातियों की स्थिति का डाटा तैयार करें। इसके आधार पर यह तय किया जाए कि किन जातियों का प्रतिनिधित्व कितना है। इसके बाद ही प्रोन्नति या पदावनति पर कोई निर्णय लिया जाए। सरकारी वकील ने इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय दिए जाने की मांग की थी। खंडपीठ ने सरकार को तीन सप्ताह की मोहलत देते हुए पदावनति पर स्थगन आदेश पारित किया था जिसे अब हटा लिया है।
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याची ने प्रोन्नति में आरक्षण पाकर ज्येष्ठता के आधार पर लाभान्वित कर्मचारियों को पदावनत करने की प्रदेश सरकार की नीति को चुनौती दी है। कहा गया कि तमाम सरकारी विभागों में इस अनुसूचित जाति-जनजाति का प्रतिनिधित्व अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इसके लिए एक आयोग बनाने की मांग की गई है जो सभी सरकारी विभागों में सर्वे करके जातियों की स्थिति का डाटा तैयार करें। इसके आधार पर यह तय किया जाए कि किन जातियों का प्रतिनिधित्व कितना है। इसके बाद ही प्रोन्नति या पदावनति पर कोई निर्णय लिया जाए। सरकारी वकील ने इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय दिए जाने की मांग की थी। खंडपीठ ने सरकार को तीन सप्ताह की मोहलत देते हुए पदावनति पर स्थगन आदेश पारित किया था जिसे अब हटा लिया है।
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