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हाईकोर्ट : वसीयत की वैधता पर राजस्व अधिकारी नहीं कर सकते अंतिम फैसला, मंडलायुक्त के आदेश के अमल पर रोक
Fri, 02 Oct 2026 06:45 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 02 Oct 2026 06:45 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वसीयत के आधार पर कृषि भूमि के नामांतरण से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि वसीयत की वैधता, उसके वास्तविक निष्पादन और वसीयतकर्ता की मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर विवाद होने पर उसका अंतिम निर्णय सक्षम सिविल कोर्ट ही कर सकता है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वसीयत के आधार पर कृषि भूमि के नामांतरण से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि वसीयत की वैधता, उसके वास्तविक निष्पादन और वसीयतकर्ता की मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर विवाद होने पर उसका अंतिम निर्णय सक्षम सिविल कोर्ट ही कर सकता है। राजस्व अधिकारी वसीयत की वैधता पर फैसला नहीं कर सकता। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने झांसी के कमिश्नर की ओर से 18 अगस्त को पारित आदेश के अमल पर रोक लगा दी है।
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साथ ही विवादित जमीन के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की एकलपीठ ने अखिलेंद्र प्रताप सिंह की याचिका पर दिया है। मामला झांसी जिले की तहसील और गांव पाली पहाड़ी स्थित कृषि भूमि से जुड़ा है। याची का दावा है कि चंदन सिंह ने उसके पक्ष में वसीयत की थी। वसीयत के आधार पर तहसीलदार ने याची के पक्ष में अभिलेख में नाम दर्ज कर दिया।
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इसे चुनौती देते हुए प्रतिवादी ने उपजिलाधिकारी के यहां अपील दायर की जो खारिज हो गई। इसके बाद मामला कमिश्नर के समक्ष पहुंचा। कमिश्नर ने वसीयत के निष्पादन और उसकी वास्तविकता पर सवाल उठाते हुए 18 अगस्त के आदेश से तहसीलदार और उपजिलाधिकारी के आदेशों को निरस्त कर दिया।
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राजस्व अभिलेख से याची का नाम हटाने और प्रतिवादी का नाम दर्ज करने आदेश जारी कर दिया। याची ने कमिश्नर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची के अधिवक्ता विभु राय ने दलील दी कि नामांतरण की कार्रवाई में वसीयत की वैधता का अंतिम निर्णय नहीं किया जा सकता। उन्होंने कमिश्नर के आदेश को चुनौती देते हुए अंतरिम राहत देने की मांग की।