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शांति भंग में अवैध निरुद्धि पर एसडीएम वाराणसी से जवाब तलब

Fri, 05 Feb 2021 12:24 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 05 Feb 2021 12:24 AM IST
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Response from SDM Varanasi on illegal rectification in breach of peace
कोर्ट - फोटो : फाइल फोटो
शांति भंग की आशंका में विधि विरुद्ध तरीके  से लोगों का चालान कर जेल भेज देने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को ऐसा मैकेनिज्म विकसित करने का निर्देश दिया है, जिससे निर्दोष लोगों का उत्पीड़न रोका जा सके। कोर्ट ने शांति भंग की आशंका में वाराणसी के शिव कुमार वर्मा का अवैध तरीके से चालान करने और उसे दस दिन तक अवैध निरुद्धि में रखने पर एसडीएम वाराणसी से भी जवाब मांगा है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को इस मामले में चार सप्ताह में उचित कार्यवाही कर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। 
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शिवकुमार वर्मा की याचिका पर न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी और न्यायमूर्ति शमीम अहमद की पीठ सुनवाई कर रही है। याची का परिवार के लोगों से संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद था। इस मामले में रोहनिया थाने की पुलिस ने आठ अक्तूबर 20 को याची का शांति भंग की आशंका में चालान कर दिया। चालानी रिपोर्ट प्रिंटेड प्रोफार्मा में भरकर जारी कर दी, जिसमें न तो शांति भंग का कोई कारण बताया गया और न ही याची से नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। एसडीएम ने इस रिपोर्ट पर याची के खिलाफ केस दर्ज जमानत पत्र न प्रस्तुत करने के आधार पर उसे जेल भेज दिया।
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शिवकुमार ने इस कार्रवाई को विधि विरुद्ध करार देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। उसका कहना था कि उसे अवैध तरीके से निरुद्धि में रखा गया। हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए सचिव गृह तरुण गाबा को तलब कर लिया था। दो फरवरी को हाईकोर्ट में पेश हुए सचिव गृह ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार सरकार ने इस आशय का आदेश जारी कर दिया है कि भविष्य में कोई भी चालानी रिपोर्ट प्रिंटेड प्रोफार्मा में जारी नहीं की जाएगी अपितु सीआरपीसी की धारा 107 व 116 के प्रावधानों के अनुसार लिखित कारण देते हुए ही जारी की जाएगी।
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डीजीपी की ओर से भी सभी पुलिस थानों को इस आशय का सकुर्लर जारी किया गया है। सचिव गृह ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि सरकार ऐसा मैकेनिज्म विकसित करेगी भविष्य में इस प्रकार की गलती न हो और सरकार पीड़ित को मुआवजा भी देगी। इस पर कोर्ट चार सप्ताह में समस्त कार्यवाही पूरी कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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