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रिसर्च  : बायोप्सी का मजबूत विकल्प बना सेंसर, पलक झपकते पहचान लेगा कैंसर

Fri, 18 Sep 2026 07:59 PM IST
विनोद सिंह शिवशंकर मिश्रा, प्रयागराज
शिवशंकर मिश्रा, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 18 Sep 2026 07:59 PM IST
सार

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी), इलाहाबाद के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सेंसर तैयार किया है जो खून के संपर्क में आते ही कैंसरकारी कोशिकाओं की सटीक पहचान कर लेगा। इससे बायोप्सी की जटिल व कष्टकारी प्रक्रिया से राहत मिलेगी।

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Research Sensor emerges robust alternative to biopsy; detects cancer blink eye.
रिसर्च। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी), इलाहाबाद के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सेंसर तैयार किया है जो खून के संपर्क में आते ही कैंसरकारी कोशिकाओं की सटीक पहचान कर लेगा। इससे बायोप्सी की जटिल व कष्टकारी प्रक्रिया से राहत मिलेगी।

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तीन साल की मेहनत के बाद प्रयोगशाला स्तर पर हुए इस शोध को मिली सफलता को बड़ी उपलब्धि मानते हुए ट्रिपलआईटी ने पिछले माह अगस्त में इसके पेंटेट के लिए आवेदन कर दिया है। ट्रिपलआईटी के अप्लाइड साइंस विभाग के प्रो. अखिलेश तिवारी के मार्गदर्शन में शोधार्थी संतोष कुमार उमर व निशांत कुमार के इस शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स (आईट्रिपल ई) ने प्रकाशित किया है।
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वैज्ञानिकों का दावा है कि सेंसर के तैयार हो जाने के बाद भविष्य में लोगों को बायोप्सी जैसी जांच की जरूरत नहीं पड़ेगी। जिस तरह केवल एक बूंद खून की जांच से मधुमेह का पता लगाया जा सकता है, ठीक उसी तरह खून के संपर्क में आते सेंसर शरीर में मौजूद कैंसरकारी कोशिकाओं का भी पता लगा लेगा। इससे कैंसर की जांच काफी आसान हो जाएगी। वैज्ञानिकों का दावा है कि सिमुलेशन के दौरान सेंसर शत प्रतिशत सटीक परिणाम दे रहा है।

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किफायती होगी जांच, समय से शुरू हो सकेगा इलाज

वैज्ञानिक प्रो. अखिलेश तिवारी के अनुसार यह सेंसर अन्य जांचों के मुकाबले लोगों के लिए अधिक किफायती साबित होगा। वहीं, बायोप्सी जांच की प्रक्रिया जटिल होती है। रिपोर्ट आने में वक्त भी लगता है जबकि सेंसर से तुरंत सटीक रिपोर्ट मिल जाएगी। इससे मरीज का समय रहते इलाज शुरू किया जा सकेगा।

ऐसे तैयार हुआ सेंसर

शोध के तहत सेंसर को बनाने में ऑप्टिकल फाइबर का इस्तेमाल किया गया। इसमें सबसे पहले ऑप्टिकल फाइबर को काटकर ‘डी’ आकार में बनाया गया। इसके बाद ऑप्टिकल फाइबर पर नैनो गोल्ड और सिल्वर मैटेरियल की प्लेट का इस्तेमाल किया गया। इस प्लेट पर कैंसर की एंटीबॉडी या एंटीजेन को लगाकर उस पर प्रकाश डालकर बदलाव को परखा गया जिसमें यह सेंसर कुछ ही सेकंड में परिणाम देने में सफल रहा।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया गया शोध

इस शोध को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी प्रस्तुत किया गया है। हाल ही में उज्बेकिस्तान के ताशकंद शहर में आयोजित ऑप्टिमा कॉन्फ्रेंस के दौरान आईट्रिपलई के फोटोनिक सोसाइटी चैप्टर के अध्यक्ष प्रो. अखिलेश तिवारी ने ‘की नोट स्पीकर’ के तौर पर अध्यक्षीय संबोधन में इसका जिक्र किया था।

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