Prayagraj News : महामंडलेश्वर की हत्या के संदिग्ध साजिशकर्ता पर रिपोर्ट दर्ज, गिरफ्तार
पुलिस को उसके पास दो आधार कार्ड मिले। इनमें से एक योगेंद्र शर्मा और दूसरा विक्रम सिंह के नाम से था। खास बात यह कि दोनों में फोटो उसी की थी। पूछताछ में पता चला कि उसने परी अखाड़ा में पहुंचकर भी अपना गलत नाम पता दर्ज कराया था।
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आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद की हत्या की साजिश के मामले में पकड़े गए संदिग्ध युवक पर रविवार को रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। उसके पास दो अलग-अलग आधार कार्ड मिले हैं। इसी के आधार पर उसके खिलाफ परी अखाड़े की आचार्य त्रिकाल भवंता की तहरीर पर धोखाधड़ी, जालसाजी समेत अन्य धाराओं में केस लिखा गया है। युवक का असली नाम योगेंद्र शर्मा है और वह बागपत का रहने वाला है।
पुलिस को उसके पास दो आधार कार्ड मिले। इनमें से एक योगेंद्र शर्मा और दूसरा विक्रम सिंह के नाम से था। खास बात यह कि दोनों में फोटो उसी की थी। पूछताछ में पता चला कि उसने परी अखाड़ा में पहुंचकर भी अपना गलत नाम पता दर्ज कराया था। जब उससे दो आधार कार्ड के बाबत पूछताछ की गई तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। उधर, देर शाम त्रिकाल भवंता ने उसके खिलाफ तहरीर दी। जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
क्या है आरोप
त्रिकाल भवंता की ओर से दी गई तहरीर में बताया गया है कि युवक 30 नवंबर से ही उनसे लगातार संपर्क कर रहा था। उसने व्हाट्सएप कॉल की थी। इस दौरान आश्रम का पता आदि पूछ लिया था। इसके बाद शनिवार को वह अखाड़े के नए यमुना पुल के नीचे स्थित आश्रम में पहुंच गया। यहां उसने एक जनवरी को आचार्य कैलाशानंद व अन्य बड़े संतों की हत्या की साजिश का खुलासा किया, जिस पर वह स्तब्ध रह गईं। इसके बाद उन्होंने पुलिस के साथ ही आचार्य को भी इसकी सूचना दी। ऐसा प्रतीत होता है कि युवक उनसे ठगी करना चाहता था।
त्रिकाल भवंता की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब तक कि जांच में यही लग रहा है कि युवक ठगी की नीयत से आश्रम में पहुंचा था।
- सौरभ दीक्षित, डीसीपी यमुनानगर
बार-बार बदलता रहा बयान
इससे पहले आरोपी बार-बार बयान बदलकर पुलिस को रातभर उलझाता रहा। एसटीएफ के साथ डीसीपी यमुनानगर ने भी उसे घंटों उससे पूछताछ की। युवक के कब्जे से मिले लैपटॉप की जांच करने पर पता चला कि उसने त्रिकाल भवंता के बारे में इंटरनेट से काफी जानकारी एकत्र की थी। उसे यह भी पता चला वह अखाड़े की मान्यता चाहती हैं। माना जा रहा है कि अखाड़े की मान्यता के नाम पर ही वह ठगी करने पहुंचा था। इस दौरान उसने खुद को आचार्य कैलाशानंद का नजदीकी भी बताया।
खुद का सेवादार भी बताया
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में युवक ने यह भी बताया कि उसने त्रिकाल भवंता से कहा था कि वह आचार्य कैलाशानंद का सेवादार है। पुलिस ने उसके मोबाइल की कॉल डिटेल भी खंगाली लेकिन कुछ खास जानकारी नहीं मिली। हालांकि पूछताछ में उसने कैलाशानंद की हत्या की साजिश रचने की बात से इंकार किया है।