फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Repeated recording of statement under Section 164 will destroy the truth

हाईकोर्ट : बार-बार धारा 164 का बयान दर्ज कराने से नष्ट होगी सत्यता, पीड़िता पर 20 हजार का हर्जाना

Sun, 15 Oct 2023 04:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 15 Oct 2023 04:36 PM IST
सार

कोर्ट ने सीजेएम आगरा के अर्जी खारिज करने के आदेश की वैधता की चुनौती याचिका बीस हजार रुपये हर्जाना लगाते हुए खारिज कर दी और याची को तीन हफ्ते में सरकार के पक्ष में डिमांड ड्राफ्ट के जरिये हर्जाना जमा करने का निर्देश दिया है।

विज्ञापन
Repeated recording of statement under Section 164 will destroy the truth
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि विवेचना अधिकारी को धारा 164 के तहत अदालत में पीड़िता का एक से अधिक बार बयान दर्ज कराने का अधिकार है। हालांकि, बिना ठोस कारण के बार-बार बयान दर्ज नहीं कराया जा सकता। ऐसा करने से बयान की सत्यता नष्ट होगी। कोर्ट ने दो बार बयान दर्ज होने के बाद पीड़िता द्वारा सही बयान दर्ज न किए जाने का आरोप लगाते हुए तीसरी बार बयान दर्ज कराने की अर्जी खारिज करने को सही करार दिया। कोर्ट ने कहा पीड़िता कानून को जानबूझकर बिना किसी वजह के औजार के रूप में इस्तेमाल कर रही है।

विज्ञापन


कोर्ट ने सीजेएम आगरा के अर्जी खारिज करने के आदेश की वैधता की चुनौती याचिका बीस हजार रुपये हर्जाना लगाते हुए खारिज कर दी और याची को तीन हफ्ते में सरकार के पक्ष में डिमांड ड्राफ्ट के जरिये हर्जाना जमा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि हर्जाना जमा न करने पर जिलाधिकारी राजस्व वसूली प्रक्रिया अपनाकर हर्जाना वसूलें और सरकार को दें।

विज्ञापन

यह आदेश न्यायमूर्ति ज्योत्स्ना शर्मा ने मनोरमा सिंह की याचिका पर दिया है। याची ने चार लोगों के खिलाफ छेड़छाड़ करने व धमकाने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। कहा था कि आरोपी ने डेढ़ लाख रुपये नौकरी दिलाने के बहाने लिए थे। पीड़िता का अदालत में दो बार बयान दर्ज किया गया। उसने मजिस्ट्रेट पर गलत बयान दर्ज करने का आरोप लगाया।

इसके बाद उसने फिर से यही आरोप लगाया और हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया। जब बिना उचित कारण तीसरी बार बयान दर्ज करने की अर्जी दी गई तो मजिस्ट्रेट ने अर्जी खारिज कर दी, जिसे चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा ट्रायल के समय याची अपना पक्ष रख सकती है। उसी समय इसपर विचार होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed