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जयंती पर याद किए गए वंदे मातरम् के रचयिता
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 27 Jun 2015 01:25 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता स्व. बंकिम चंद्र चटर्जी की 177वां जयंती शुक्रवार को मनाई गई। सिविल लाइंस स्थित प्रयाग संगीत समिति में भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा और स्वामी विवेकानंद सामाजिक विकास संस्थान की ओर से एक संगोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमापति राम त्रिपाठी ने ‘वंदे मातरम्’ को महामंत्र बताया।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रवाद, राष्ट्रवाद और संप्रदायवाद को अगर दूर करने के लिए ‘वंदे मातरम्’ महामंत्र जरूरी है। यह राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र जागरण का महामंत्र है। सांसद केशव प्रसाद मौर्य ने योग दिवस की तर्ज पर ‘वंदे मातरम्’ दिवस मनाने की अपील की। सांसद विनोद सोनकर ने भी ‘वंदे मातरम्’ पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जिस महामंत्र ने देश को आजादी दिलाई, वह सांप्रदायिक कैसे हो गया।
कार्यक्रम में एडीशनल सालीसीटर जनरल अशोक मेहता ने कहा कि देश के हर नागरिक को बंकिम चंद्र चटर्जी की कृति ‘आनंदमठ’ जिसका ‘वंदे मातरम्’ अंश है, जरूर पढ़ना चाहिए। गोष्ठी की अध्यक्षता समाजसेवी डॉ. मिलन मुखर्जी ने एवं संचालन भाजपा नेता आचार्य कुशमुनि स्वरूप ने किया। इस मौके पर कमलेश कुमार, रमेश ओझा, दिवाकर त्रिपाठी, मुरारी लाल अग्रवाल, अनामिका चौधरी, अवधेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि क्षेत्रवाद, राष्ट्रवाद और संप्रदायवाद को अगर दूर करने के लिए ‘वंदे मातरम्’ महामंत्र जरूरी है। यह राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र जागरण का महामंत्र है। सांसद केशव प्रसाद मौर्य ने योग दिवस की तर्ज पर ‘वंदे मातरम्’ दिवस मनाने की अपील की। सांसद विनोद सोनकर ने भी ‘वंदे मातरम्’ पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जिस महामंत्र ने देश को आजादी दिलाई, वह सांप्रदायिक कैसे हो गया।
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कार्यक्रम में एडीशनल सालीसीटर जनरल अशोक मेहता ने कहा कि देश के हर नागरिक को बंकिम चंद्र चटर्जी की कृति ‘आनंदमठ’ जिसका ‘वंदे मातरम्’ अंश है, जरूर पढ़ना चाहिए। गोष्ठी की अध्यक्षता समाजसेवी डॉ. मिलन मुखर्जी ने एवं संचालन भाजपा नेता आचार्य कुशमुनि स्वरूप ने किया। इस मौके पर कमलेश कुमार, रमेश ओझा, दिवाकर त्रिपाठी, मुरारी लाल अग्रवाल, अनामिका चौधरी, अवधेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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