High Court : कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला को राहत, पठनीय दस्तावेज मिलने तक उत्पीड़नात्मक कार्यवाही पर रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने वाराणसी की विशेष अदालत को निर्देश दिया है कि यदि आठ दिन में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला चार्जशीट व दस्तावेजों की पठनीय प्रति देने की अर्जी दें तो पठनीय दस्तावेज मुहैया कराएं और अपनी संतुष्टि भी दर्ज करें।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी की विशेष अदालत को आदेश दिया है कि सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन में कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला को चार्जशीट समेत अभियोजन के सभी पठनीय दस्तावेज आठ दिन के भीतर मुहैया करवा कर अपनी संतुष्टी भी दर्ज करें। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि पठनीय दस्तावेजों की मांग वाली अर्जी के निस्तारण तक सुरजेवाला के विरूद्ध किसी भी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न की जाए।
यह आदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजवीर सिंह ने कांग्रेस नेता सुरजेवाला की ओर से विशेष अदालत द्वारा आरोप पत्र और अभियोजन के पठनीय दस्तावेज न देने के खिलाफ दाखिल याचिका को निस्तारित करते हुए दिया। याची कांग्रेस नेता सुरजेवाला की ओर से बहस कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एसजी हसनैन का कहना था कि 23 साल पुराने आपराधिक मामले में बतौर आरोपी सुरजेवाला को विशेष अदालत ने तलब किया था। तलबी आदेश के साथ सम्पूर्ण आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने निस्तारित करते हुए अधिवक्ता के माध्यम से दोषमुक्ति का प्रार्थना पत्र दाखिल करने का आदेश दिया था।
सुरजेवाला ने उस खिलाफ सुप्रीमकोर्ट का दरवजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को आरोप पत्र और अभियोजन के पठनीय दस्तावेज सुरजेवाला को मुहैया करवाने का आदेश दिया था, जिसके अनुपालन में ट्रायल कोर्ट ने जो प्रति मुहैया करवाई वह भी अपठनीय ही थी। याची ने दुबारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन बार-बार आदेशों के बावजूद ट्रायल कोर्ट द्वारा अपठनीय प्रति ही उपलब्ध करवाई गई, जो दंड प्रकिय संहिता की धारा 207 का स्पष्ट उल्लंघन है।
राज्य सरकार की ओर से बहस कर रहे अपर शासकीय अधिवक्ता विकास सहाय ने कहा कि याची द्वारा तकनीकी आधार पर को लम्बे समय तक लंबित रखने की कोशिश की जा रही है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया है कि याची को आठ दिनों के भीतर सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट के आदेेशों के अनुपालन में आरोप पत्र और अभियोजन के सभी पठनीय दस्तावेज मुहैया करवाएं। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि पठनीय दस्तावेजों के लिए याची द्वारा दी गई अर्जी के निस्तारण तक याची के विरूद्ध किसी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्यवाही न की जाएं।