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राम जन्मभूमि हमला में तीन आतंकियों की जमानत खारिज
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 07 Aug 2016 02:17 AM IST
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अदालत
- फोटो : file
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जिला न्यायालय ने राम जन्मभूमि पर हुए आतंकी हमल के मामले में नैनी जेल में बंद आरोपी नसीम, मो.अजीज और मो.शकील की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
जमानत प्रार्थनापत्र पर विशेष न्यायाधीश प्रेमनाथ ने सुनवाई की। अभियोजन अधिकारी जीसी अग्रहरि ने जमानत प्रार्थनापत्र का विरोध किया। अभियोजन के अनुसार पांच जुलाई 2005 को सुबह नौ बजे अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर में कुछ आतंकवादियों ने हमला कर विस्फोट कर दिया था। घटना में सुरक्षा बलों ने पांच आतंकियों को मार गिराया था। घटना में दो नागरिकों की भी मौत हो गई।
दौरान विवेचना मौके पर एक मृत आतंकी के पास से बरामद मोबाइल के ईएमईआई नंबर से पांच आतंकियों का नाम प्रकाश में आया है, जो घटना के षड़यंत्र में शामिल थे। अभियुक्तगण पर आरोप है कि जिस जीप से असलहे अलीगढ़ तक पहुंचाए गए, उसको यह अभियुक्त आसिफ इकबाल चला कर ले गया था और मोबाइल फोन अभियुक्त नसीम और मो.अजीज के द्वारा खरीदा गया था। मोबाइल फोन से कई पाकिस्तानी आतंकवादियों से बातचीत की गई, जिसके बाद ही घटना को अंजाम दिया गया है।
बचाव पक्ष की ओर से अभियुक्तगण को निर्दोष बताया गया है। अभियोजन ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि घटना में एरिया कमांडर लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी के कहने पर अभियुक्त द्वारा अपनी आईडी पर सिम खरीदा गया और उसका प्रयोग मो.अजीज द्वारा किया गया। मामले के अभियुक्त मो.अजीज और मो.शकील की जमानत पूर्व में खारिज की जा चुकी है।
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अदालत ने अभियुक्त मो.नसीम की प्रथम और मो.अजीज और मो.शकील की द्वितीय जमानत अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि घटना देश की आंतरिक सुरक्षा प्रभावित करने वाली और गंभीर प्रकृति की है। जमानत का कोई आधार नहीं है।
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जमानत प्रार्थनापत्र पर विशेष न्यायाधीश प्रेमनाथ ने सुनवाई की। अभियोजन अधिकारी जीसी अग्रहरि ने जमानत प्रार्थनापत्र का विरोध किया। अभियोजन के अनुसार पांच जुलाई 2005 को सुबह नौ बजे अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर में कुछ आतंकवादियों ने हमला कर विस्फोट कर दिया था। घटना में सुरक्षा बलों ने पांच आतंकियों को मार गिराया था। घटना में दो नागरिकों की भी मौत हो गई।
दौरान विवेचना मौके पर एक मृत आतंकी के पास से बरामद मोबाइल के ईएमईआई नंबर से पांच आतंकियों का नाम प्रकाश में आया है, जो घटना के षड़यंत्र में शामिल थे। अभियुक्तगण पर आरोप है कि जिस जीप से असलहे अलीगढ़ तक पहुंचाए गए, उसको यह अभियुक्त आसिफ इकबाल चला कर ले गया था और मोबाइल फोन अभियुक्त नसीम और मो.अजीज के द्वारा खरीदा गया था। मोबाइल फोन से कई पाकिस्तानी आतंकवादियों से बातचीत की गई, जिसके बाद ही घटना को अंजाम दिया गया है।
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बचाव पक्ष की ओर से अभियुक्तगण को निर्दोष बताया गया है। अभियोजन ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि घटना में एरिया कमांडर लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी के कहने पर अभियुक्त द्वारा अपनी आईडी पर सिम खरीदा गया और उसका प्रयोग मो.अजीज द्वारा किया गया। मामले के अभियुक्त मो.अजीज और मो.शकील की जमानत पूर्व में खारिज की जा चुकी है।
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अदालत ने अभियुक्त मो.नसीम की प्रथम और मो.अजीज और मो.शकील की द्वितीय जमानत अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि घटना देश की आंतरिक सुरक्षा प्रभावित करने वाली और गंभीर प्रकृति की है। जमानत का कोई आधार नहीं है।