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High Court : पॉक्सो की हर जमानत याचिका को खारिज करना ट्रायल कोर्ट का पूर्वाग्रह, आरोपी की जमानत मंजूर

Sat, 06 Jul 2024 11:17 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 06 Jul 2024 11:17 AM IST
सार

मामले में जालौन निवासी अनुरुद्ध पर कोतवाली उरई में पॉक्सो, दुष्कर्म सहित अन्य मामलों मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप था कि उसने नाबालिग को बहला-फुसला कर भगा ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी पांच अगस्त 2023 से जेल में है। ट्रायल कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद उसने हाईकोर्ट से गुहार लगाई।

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Rejecting every bail petition of POCSO is bias of the trial court, bail of the accused approved
अदालत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पॉक्सो मामलों में पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से अधिक होने व बयान में सहमति से संबंध बनाने की बात स्वीकारने के बाद भी ट्रायल कोर्ट जमानत देने से इन्कार कर रहे हैं। यह ट्रायल कोर्ट के पूर्वाग्रह को दर्शाता है। न्यायमूर्ति अजय भनोट की कोर्ट ने दुष्कर्म व पॉक्सो के आरोपी अनुरुद्ध की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की। याची अधिवक्ता फख्र उज जमां और अपर शासकीय अधिवक्ता परितोष कुमार मालवीय ने पक्ष रखा।

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मामले में जालौन निवासी अनुरुद्ध पर कोतवाली उरई में पॉक्सो, दुष्कर्म सहित अन्य मामलों मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप था कि उसने नाबालिग को बहला-फुसला कर भगा ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी पांच अगस्त 2023 से जेल में है। ट्रायल कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद उसने हाईकोर्ट से गुहार लगाई।

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याची अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से अधिक है। उसने अपनी मर्जी से युवक संग संबंध बनाए हैं। पीड़िता ने अपने बयानों में आरोपी के खिलाफ अपहरण, गलत तरीके से हिरासत में रखने, दुष्कर्म का कोई आरोप नहीं लगाया है। वहीं, अपर शासकीय अधिवक्ता ने इसका विरोध किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने व तथ्यों का अध्ययन करने के बाद आरोपी की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।
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जमानत खारिज करके इमानदार बनने की मानसिकता बदलनी होगी

न्यायाधीश ने कहा कि अगर ट्रायल कोर्ट की ऐसी मानसिकता है कि पॉक्सो मामलों में जमानत खारिज करके ही इमानदारी दिखाई जा सकता है तो इसे बदलना होगा। जिला न्यायाधीशों को उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाने चाहिए। कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस आदेश की एक प्रति निदेशक, न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, लखनऊ व विद्वान जिला न्यायाधीशों को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजी जाए।

उच्च न्यायालय को अभिभावक की तरह ट्रायल कोर्ट को मजबूत करना चाहिए

कोर्ट ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय को ट्रायल कोर्ट को डराना नहीं चाहिए,बल्कि एक अभिभावक की तरह उसे मजबूत करना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि ट्रायल न्यायाधीशों की स्वायत्तता बनी रहे और वह स्वतंत्र व निष्पक्ष रूप से कार्य कर सकें। इसकी देखरेख के लिए संविधान ने हाईकोर्ट को बड़ी जिम्मेदारी दी है।

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