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चचेरी बहन पर कातिलाना हमला करने वाले किशोर को जमानत देने से इंकार
Fri, 29 Jan 2021 01:05 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 29 Jan 2021 01:05 AM IST
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allahabad high court
- फोटो : social media
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चचेरी बहन पर चाकू से कातिलाना हमला करने के आरोपी किशोर को जमानत देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी द्वारा किया गया अपराध काफी गंभीर है। किशोर न्याय अधिनियम के तहत जमानत देने से अपवाद स्वरूप इंकार भी किया जा सकता है। गाजियाबाद के किशोर की आपराधिक पुनरीक्षण अर्जी खारिज करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने दिया।
कोर्ट ने कहा कि जिस प्रकार से अपराध को अंजाम दिया गया, उससे समाज में भय का माहौल पैदा हो गया है। इससे यह संदेश भी जाता है कि सगे रिश्तेदारों से भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं है। कोर्ट ने मुकदमे का विचारण तीन माह में पूरा करने का आदेश दिया है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची बाल अपचारी है। उसकी आयु पंद्रह वर्ष से कुछ कम ही है।
उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 12(1) के तहत किशोर को जमानत देने से अपवाद स्वरूप ही इंकार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि इसमें संदेह नहीं है कि किशोर को सामान्यत: जमानत दी जानी चाहिए मगर कानून ने इसमें तीन अपवाद भी रखे हैं। जिसके तहत जमानत देने से इंकार किया जा सकता है।
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घटना की परिस्थितियां बताती हैं कि आरोपी अपने चाचा के घर में रात एक बजे घुसा और सो रही चचेरी बहन पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए। उसके गले और पेट पर चाकू मारे, जिससे जाहिर है कि उसका इरादा जान से मार देने का था। उसने चाकू से नौ गंभीर वार किए हैं। इससे यह संदेश जाता है कि परिवार सदस्यों से भी कोई सुरक्षित नहीं है। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
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कोर्ट ने कहा कि जिस प्रकार से अपराध को अंजाम दिया गया, उससे समाज में भय का माहौल पैदा हो गया है। इससे यह संदेश भी जाता है कि सगे रिश्तेदारों से भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं है। कोर्ट ने मुकदमे का विचारण तीन माह में पूरा करने का आदेश दिया है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची बाल अपचारी है। उसकी आयु पंद्रह वर्ष से कुछ कम ही है।
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उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 12(1) के तहत किशोर को जमानत देने से अपवाद स्वरूप ही इंकार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि इसमें संदेह नहीं है कि किशोर को सामान्यत: जमानत दी जानी चाहिए मगर कानून ने इसमें तीन अपवाद भी रखे हैं। जिसके तहत जमानत देने से इंकार किया जा सकता है।
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घटना की परिस्थितियां बताती हैं कि आरोपी अपने चाचा के घर में रात एक बजे घुसा और सो रही चचेरी बहन पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए। उसके गले और पेट पर चाकू मारे, जिससे जाहिर है कि उसका इरादा जान से मार देने का था। उसने चाकू से नौ गंभीर वार किए हैं। इससे यह संदेश जाता है कि परिवार सदस्यों से भी कोई सुरक्षित नहीं है। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।