{"_id":"5ea072b28ebc3e90655808c3","slug":"recruitment-will-be-done-through-written-examination-in-minority-colleges","type":"story","status":"publish","title_hn":"अल्पसंख्यक कॉलेजों में लिखित परीक्षा से ही होगी भर्ती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अल्पसंख्यक कॉलेजों में लिखित परीक्षा से ही होगी भर्ती
Wed, 22 Apr 2020 10:07 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 22 Apr 2020 10:07 PM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के एडेड अल्पसंख्यक कॉलेजों में अध्यापकों की नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा अनिवार्य किए जाने के सरकार के निर्णय को सही करार दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार के उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट एक्ट के रेगुलेशन 17 चैप्टर द्वितीय में किए गए संशोधन को वैध करार देते हुए कहा कि यह संशोधन अल्पसंख्यक विद्यालयों को अनुच्छेद 30 के तहत मिले प्रबंधन के अधिकार का उल्लंघन नहीं करता।
कोर्ट ने निजी एजेंसी से लिखित परीक्षा से अल्पसंख्यक विद्यालयों में अध्यापक भर्ती का रास्ता साफ कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा की खंडपीठ ने नेशनल इंटर कॉलेज शिकारपुर बुलंदशहर सहित 32 अन्य याचिकाओं को खारिज करते हुए दिया है।
राज्य सरकार ने इस संशोधन के जरिए व्यवस्था दी है कि सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक विद्यालयों के अध्यापकों की भर्ती में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के निर्देशन में निजी एजेंसी द्वारा लिखित परीक्षा लेकर मेरिट के आधार पर भर्ती की जाएगी। प्राइवेट एजेंसी भर्ती प्रक्रिया पूरी कर मेरिट के आधार पर शिक्षा अधिकारियों के मार्फत कालेज की प्रबंध समिति को चयनित अभ्यर्थियों का नाम भेजेगी, जिनकी नियुक्ति प्रबंध समिति करेगी।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा की निजी एजेंसी से लिखित परीक्षा करा कर अल्पसंख्यक वित्तीय सहायता प्राप्त कालेजों में अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया पारदर्शिता पूर्ण, पक्षपात रहित है। यह प्रक्रिया किसी भी तरीके से मनमाना पूर्ण नहीं है। इसमें फेयरवेस है। यह छात्रों एवं जनहित में होने के साथ-साथ राष्ट्रीय हित में भी है। इस प्रक्रिया से अल्पसंख्यक विद्यालयों में योग्य अध्यापक मिल सकेंगे।
कोर्ट ने कहा की अध्यापकों की भर्ती मामले में सरकार का सीधा रोल नहीं है, न ही सरकार इसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप कर रही है। सरकार ने अध्यापकों की शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए प्राइवेट एजेंसी से लिखित परीक्षा करा कर योग्य अध्यापकों की नियुक्ति की व्यवस्था की है। अभी तक विद्यालयों की प्रबंध समिति साक्षात्कार के जरिए अपने अध्यापकों की नियुक्ति करती रही है।
कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति का अधिकार प्रबंध समिति को होगा। चयन प्रक्रिया सरकारी निर्देशन में प्राइवेट एजेंसी द्वारा पूरी की जाएगी और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए अग्रसारित किया जाएगा, जिन्हें नियुक्त करने का प्रबंध कमेटी को पूरा अधिकार होगा। इस मामले में सरकारी अधिकारियों का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। याचिकाओं में उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम रेगुलेशन 17 चैप्टर 2 एवं 20 मार्च 2018 को जारी अधिसूचना की वैधता को चुनौती दी गई थी।
याचियों का कहना था कि यह उपबंध अनुच्छेद 30 के अंतर्गत अल्पसंख्यक विद्यालयों के को मिले मूल अधिकारों का खुला उल्लंघन है, जिसे रद्द किया जाए। कोर्ट ने कहा कि संयुक्त शिक्षा निदेशक के निर्देशन में प्राइवेट एजेंसी द्वारा लिखित परीक्षा कराना और मेरिट लिस्ट तैयार कर नियुक्ति के लिए प्रबंध समिति को अग्रसारित करना, अनुच्छेद 30 के अंतर्गत अल्पसंख्यक विद्यालयों को मिले अधिकारों में किसी प्रकार से हस्तक्षेप नहीं है।
विज्ञापन
कोर्ट ने निजी एजेंसी से लिखित परीक्षा से अल्पसंख्यक विद्यालयों में अध्यापक भर्ती का रास्ता साफ कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा की खंडपीठ ने नेशनल इंटर कॉलेज शिकारपुर बुलंदशहर सहित 32 अन्य याचिकाओं को खारिज करते हुए दिया है।
विज्ञापन
राज्य सरकार ने इस संशोधन के जरिए व्यवस्था दी है कि सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक विद्यालयों के अध्यापकों की भर्ती में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के निर्देशन में निजी एजेंसी द्वारा लिखित परीक्षा लेकर मेरिट के आधार पर भर्ती की जाएगी। प्राइवेट एजेंसी भर्ती प्रक्रिया पूरी कर मेरिट के आधार पर शिक्षा अधिकारियों के मार्फत कालेज की प्रबंध समिति को चयनित अभ्यर्थियों का नाम भेजेगी, जिनकी नियुक्ति प्रबंध समिति करेगी।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा की निजी एजेंसी से लिखित परीक्षा करा कर अल्पसंख्यक वित्तीय सहायता प्राप्त कालेजों में अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया पारदर्शिता पूर्ण, पक्षपात रहित है। यह प्रक्रिया किसी भी तरीके से मनमाना पूर्ण नहीं है। इसमें फेयरवेस है। यह छात्रों एवं जनहित में होने के साथ-साथ राष्ट्रीय हित में भी है। इस प्रक्रिया से अल्पसंख्यक विद्यालयों में योग्य अध्यापक मिल सकेंगे।
कोर्ट ने कहा की अध्यापकों की भर्ती मामले में सरकार का सीधा रोल नहीं है, न ही सरकार इसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप कर रही है। सरकार ने अध्यापकों की शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए प्राइवेट एजेंसी से लिखित परीक्षा करा कर योग्य अध्यापकों की नियुक्ति की व्यवस्था की है। अभी तक विद्यालयों की प्रबंध समिति साक्षात्कार के जरिए अपने अध्यापकों की नियुक्ति करती रही है।
कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति का अधिकार प्रबंध समिति को होगा। चयन प्रक्रिया सरकारी निर्देशन में प्राइवेट एजेंसी द्वारा पूरी की जाएगी और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए अग्रसारित किया जाएगा, जिन्हें नियुक्त करने का प्रबंध कमेटी को पूरा अधिकार होगा। इस मामले में सरकारी अधिकारियों का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। याचिकाओं में उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम रेगुलेशन 17 चैप्टर 2 एवं 20 मार्च 2018 को जारी अधिसूचना की वैधता को चुनौती दी गई थी।
याचियों का कहना था कि यह उपबंध अनुच्छेद 30 के अंतर्गत अल्पसंख्यक विद्यालयों के को मिले मूल अधिकारों का खुला उल्लंघन है, जिसे रद्द किया जाए। कोर्ट ने कहा कि संयुक्त शिक्षा निदेशक के निर्देशन में प्राइवेट एजेंसी द्वारा लिखित परीक्षा कराना और मेरिट लिस्ट तैयार कर नियुक्ति के लिए प्रबंध समिति को अग्रसारित करना, अनुच्छेद 30 के अंतर्गत अल्पसंख्यक विद्यालयों को मिले अधिकारों में किसी प्रकार से हस्तक्षेप नहीं है।