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बीडीओ के 460 पदों पर फंसी भर्ती
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बीडीओ के 460 पदों पर फंसी भर्ती
प्रयागराज। खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के 460 पद रिक्त होने के बावजूद वर्षों से भर्तियां फंसी हुई हैं। जनसुनवाई के एक मामले का निस्तारण करते हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने माना है कि इन रिक्त पदों पर भर्ती के लिए उसे कोई अधियाचन ही नहीं मिला। पदों का अधियाचन ग्राम विकास विभाग को भेजना था, लेकिन विभाग ने इसे गंभीरता से लिया ही नहीं और पद खाली होने के बाद भी बेरोजगारों को नौकरी के लिए भटकना पड़ रहा है।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी ने जनसुनवाई में मांग की थी कि पीसीएस-2018 में बीडीओ के रिक्त पड़े 460 पदों को शामिल किया जाए। यही मांग पीसीएस-2017 को लेकर भी की गई थी, लेकिन बीडीओ के रिक्त पदों को पीसीएस में शामिल नहीं किया गया। पीसीएस-2018 में बीडीओ के महज छह पद हैं। जनसुनवाई पर अपील के बाद अब यूपीपीएससी के उपसचिव एवं जन सुनवाई प्रणाली के नोडल अधिकारी पुष्कर श्रीवास्तव ने अवनीश पांडेय को जवाब दिया है कि बीडीओ के 460 पदों का अधियाचन आयोग को प्राप्त नहीं हुआ है।
यह हालत तब है, जब 14 सितंबर 2018 को तत्कालीन प्रमुख सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी करते हुए बीडीओ के रिक्त पड़े 460 पदों पर अतिरिक्त प्रभार पर काबिज अफसरों के भ्रष्ट आचरण का उल्लेख किया था। वहीं, एक अगस्त 2017 को तत्कालीन मुख्य सचिव राजीव कुमार ने सभी अपर सचिवों, प्रमुख सचिवों और सचिवों का पत्र जारी कर निर्देश दिए थे कि सेवानिवृत्ति, पदत्याग आदि के कारण रिक्तियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में रिक्तियों के सापेक्ष चयन की प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए रिटायरमेंट से तीन साल पहले ही पदों का अधियाचन भर्ती आयोग को प्रेषित कर दिया जाए, ताकि शासकीय कार्य प्रभावित न हो।
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हालांकि, इस तरह के तमाम दिशा-निर्देश जारी होने के बाद भी ग्राम विकास विभाग ने बीडीओ के रिक्त पड़े 460 पदों का अधियाचन नहीं भेजा और इन पदों का प्रभार ऐसे अफसरों को दे दिया गया जो इसके लिए अर्हता नहीं रखते थे। अवनीश ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मांग की है कि पीसीएस-2019 के माध्यम से खंड विकास अधिकारी के रिक्त पड़े 460 पदों को भरे जाने के लिए आयोग को अधियाचन भेजने के लिए निर्देश दें। साथ ही उन अधिकारियों की जांच कराई जाए जिन्हें अब तक नियमित रूप से बीडीओ पद का अतिरिक्त प्रभार प्राप्त होता रहा है। अवनीश का कहना है कि बीडीओ के रिक्त पदों पर भ्रष्ट अधिकारियों अतिरिक्त प्रभार देने की परंपरा पूर्व की सरकार में शुरू हुई और इसी वजह से भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ा है।
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प्रयागराज। खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के 460 पद रिक्त होने के बावजूद वर्षों से भर्तियां फंसी हुई हैं। जनसुनवाई के एक मामले का निस्तारण करते हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने माना है कि इन रिक्त पदों पर भर्ती के लिए उसे कोई अधियाचन ही नहीं मिला। पदों का अधियाचन ग्राम विकास विभाग को भेजना था, लेकिन विभाग ने इसे गंभीरता से लिया ही नहीं और पद खाली होने के बाद भी बेरोजगारों को नौकरी के लिए भटकना पड़ रहा है।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी ने जनसुनवाई में मांग की थी कि पीसीएस-2018 में बीडीओ के रिक्त पड़े 460 पदों को शामिल किया जाए। यही मांग पीसीएस-2017 को लेकर भी की गई थी, लेकिन बीडीओ के रिक्त पदों को पीसीएस में शामिल नहीं किया गया। पीसीएस-2018 में बीडीओ के महज छह पद हैं। जनसुनवाई पर अपील के बाद अब यूपीपीएससी के उपसचिव एवं जन सुनवाई प्रणाली के नोडल अधिकारी पुष्कर श्रीवास्तव ने अवनीश पांडेय को जवाब दिया है कि बीडीओ के 460 पदों का अधियाचन आयोग को प्राप्त नहीं हुआ है।
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यह हालत तब है, जब 14 सितंबर 2018 को तत्कालीन प्रमुख सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी करते हुए बीडीओ के रिक्त पड़े 460 पदों पर अतिरिक्त प्रभार पर काबिज अफसरों के भ्रष्ट आचरण का उल्लेख किया था। वहीं, एक अगस्त 2017 को तत्कालीन मुख्य सचिव राजीव कुमार ने सभी अपर सचिवों, प्रमुख सचिवों और सचिवों का पत्र जारी कर निर्देश दिए थे कि सेवानिवृत्ति, पदत्याग आदि के कारण रिक्तियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में रिक्तियों के सापेक्ष चयन की प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए रिटायरमेंट से तीन साल पहले ही पदों का अधियाचन भर्ती आयोग को प्रेषित कर दिया जाए, ताकि शासकीय कार्य प्रभावित न हो।
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हालांकि, इस तरह के तमाम दिशा-निर्देश जारी होने के बाद भी ग्राम विकास विभाग ने बीडीओ के रिक्त पड़े 460 पदों का अधियाचन नहीं भेजा और इन पदों का प्रभार ऐसे अफसरों को दे दिया गया जो इसके लिए अर्हता नहीं रखते थे। अवनीश ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मांग की है कि पीसीएस-2019 के माध्यम से खंड विकास अधिकारी के रिक्त पड़े 460 पदों को भरे जाने के लिए आयोग को अधियाचन भेजने के लिए निर्देश दें। साथ ही उन अधिकारियों की जांच कराई जाए जिन्हें अब तक नियमित रूप से बीडीओ पद का अतिरिक्त प्रभार प्राप्त होता रहा है। अवनीश का कहना है कि बीडीओ के रिक्त पदों पर भ्रष्ट अधिकारियों अतिरिक्त प्रभार देने की परंपरा पूर्व की सरकार में शुरू हुई और इसी वजह से भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ा है।