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High Court: हथियार की बरामदगी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए अनिवार्य शर्त नहीं

Tue, 10 Jun 2025 06:59 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 10 Jun 2025 06:59 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हथियार की बरामदगी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए अनिवार्य शर्त नहीं है। खासकर जब प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य उपलब्ध हों। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने मृतक के पति और ननद की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए आपराधिक अपील खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिरला व न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की खंडपीठ ने सर्वनारायण तिवारी और सरस्वती देवी की अपील पर दिया।

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Recovery of weapon not mandatory condition for conviction of accused
Court - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हथियार की बरामदगी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए अनिवार्य शर्त नहीं है। खासकर जब प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य उपलब्ध हों। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने मृतक के पति और ननद की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए आपराधिक अपील खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिरला व न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की खंडपीठ ने सर्वनारायण तिवारी और सरस्वती देवी की अपील पर दिया।

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बलिया के श्रीराम तिवारी ने 1984 में पुलिस को सूचित किया कि उनके पड़ोसी सीताराम तिवारी की बहू अपने घर में जली हुई मृत पाई गई है। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर चीरा का घाव और गला घोंटने से हुई मृत्यु के आधार पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया। मामले में पति सर्वनारायण तिवारी, देवर शुभ नारायण तिवारी, ननद सरस्वती देवी, ससुर सीताराम तिवारी को नामजद किया गया।

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ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सभी ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। देवर व ससुर की मृत्यु के चलते इनका मामला पहले ही समाप्त कर दिया गया है।

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अपीलकर्ताओं में मृतका के पति और ननद के वकील ने दलील दी कि घटना में प्रयुक्त धारदार हथियार बरामद नहीं हुआ है। किसी भी गवाह ने पूरी घटना नहीं देखी है। यह परिस्थितिजन्य साक्ष्य का मामला है और कड़ियां स्थापित नहीं हुई हैं। ऐसे में अपील स्वीकार किया जाना चाहिए।


 

कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद इसे प्रत्यक्ष साक्ष्य का मामला माना। कोर्ट ने कहा कि गवाहों ने आरोपियों का पीड़िता को घर के बाहर पीटना, उसे घर के अंदर ले जाना और घर से धुंआ उठना तथा मृतका का जला हुआ शव देखा है। पोस्टमार्टम और चिकित्सा साक्ष्य भी अभियोजन पक्ष के मामले की पुष्टि करते हैं। इन सब तथ्यों व सुप्रीम कोर्ट के मामलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने अपील खारिज कर दी। साथ ही अपीलकर्ताओं को ट्रायल कोर्ट की ओर से दी गई सजा काटने के लिए तुरंत हिरासत में लेने का निर्देश दिया।

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