गंगा का हाल-बेहाल, कामों पर उठे सवाल
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केंद्र सरकार भले ही वर्ष 2018 तक गंगा को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त करने का दावा कर रही है लेकिन इस बारे में केंद्र के प्रयास नाकाफी ही साबित हो रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की हाई पावर कमेटी ने गंगा की स्वच्छता को लेकर अब तक हुए कामों पर सवाल खड़े किए हैं। इलाहाबाद में जलस्तर कम होने से गंगा की स्थिति दिन प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। माघ मेला खत्म होने के साथ ही गंगाजल भी काला होने लगा है। केंद्र सरकार ने गंगा की सेहत सुधारने को अलग मंत्रालय बनाया। करीब डेढ़ वर्ष बीत गए। गंगा को लेकर बड़ी-बड़ी घोषणाएं हुई लेकिन गंगा स्वच्छता को लेकर किए जा रहे प्रयास नहीं दिख रहे।
गंगा की मॉनीटरिंग कर रही एनजीटी की हाई पावर कमेटी के प्रमुख विशेषज्ञ प्रोफेसर एए काजमी पहले ही कह चुके हैं कि गंगा की स्वच्छता के लिए काम कर रहे विभागों में आपसी समन्वय न होने से काम की रफ्तार काफी धीमी है। एसटीपी, नालों से सीधे गंगा में जा रहा गंदा पानी
इलाहाबाद में गंगा का हाल बेहाल है। यहां गंगा किनारे पोंगहट, मेहंदौरी स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। दोनों एसटीपी के साथ सलोरी एसटीपी से लगातार गंदा पानी गंगा में छोड़ा जा रहा है। सलोरी से लेकर दारागंज तक कई नालों का पानी भी सीधे गंगा में गिर रहा है। नतीजा यह है कि दारागंज में दशाश्वमेध घाट से शास्त्री पुल होकर संगम तक गंगाजल का रंग काला हो गया है।
जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, जलस्तर में और गिरावट होगी। ऐसे में प्रदूषण भी तेजी से बढ़ेगा। कानपुर में भी फैक्ट्रियों और टेनरियों से निकलने वाला गंदा पानी गंगा में गिर रहा है। इलाहाबाद में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई का काम काफी धीमा है। ऐसे में हाई पावर कमेटी के अगले इलाहाबाद दौरे में एसटीपी के हाल को लेकर सवाल खड़े करना लाजिमी है।
गंगा की सफाई के लिए केंद्र सरकार ने यहां ट्रैस स्कीमर मशीन भेजी है लेकिन गंगा में कम जलस्तर के कारण मशीन की उपयोगिता पर भी सवालिया निशान है। मशीन गहरे जल से गंदगी निकालती है। गर्मी बढ़ने के साथ जलस्तर में और कमी आएगी। ऐसे में ट्रैस स्कीमर मशीन से गंगा में सफाई करना भी मुश्किल होगा।