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Prayagraj रामपुर के बीईओ स्वदीप कनौजिया निलंबित, आदेशों की अनदेखी व लापरवाही में पाए गए दोषी
Wed, 15 Apr 2026 11:56 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 15 Apr 2026 11:56 AM IST
सार
सूत्रों के अनुसार स्वदीप कनौजिया के कार्य व्यवहार को लेकर पहले भी शिकायतें मिली थीं। मार्च माह में रामपुर के जिलाधिकारी ने उनके अनुपस्थित रहने और विभागीय कार्यों में अनावश्यक देरी पर नाराजगी जताई थी।
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बीईओ निलंबित
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रामपुर जिले में खंड शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) स्वदीप कनौजिया को गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोपों में निलंबित कर दिया है। जांच में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बिना सूचना के कार्यालय से अनुपस्थित रहने, उच्चाधिकारियों के आदेशों का पालन न करने, विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने और पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने के आरोप सही पाए गए।
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सूत्रों के अनुसार स्वदीप कनौजिया के कार्य व्यवहार को लेकर पहले भी शिकायतें मिली थीं। मार्च माह में रामपुर के जिलाधिकारी ने उनके अनुपस्थित रहने और विभागीय कार्यों में अनावश्यक देरी पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) रामपुर ने 15 मार्च को पत्र भेजकर अवगत कराया कि स्वार के बीईओ के स्थानांतरण के बाद स्वदीप कनौजिया को अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। लेकिन उन्होंने इसका अनुपालन नहीं किया।
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इससे पहले तत्कालीन बीएसए एवं जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) की प्राचार्य नीलम रानी टम्टा ने 31 जनवरी 2025 को चमरौआ का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा था। जिसे भी उन्होंने ग्रहण नहीं किया। इसके अलावा शिक्षकों की जांच में लीपापोती करने सहित अन्य गंभीर आरोप भी सामने आए। अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कामता राम पाल ने बताया कि विस्तृत जांच के बाद आरोपों की पुष्टि होने पर स्वदीप कनौजिया को निलंबित कर दिया गया है।
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प्रदेश में 14 बीईओ पहले से निलंबित
प्रदेश में पहले से ही 14 खंड शिक्षा अधिकारी विभिन्न आरोपों के चलते निलंबित चल रहे हैं। इन पर शिक्षकों को प्रताड़ित करने, अवकाश के नाम पर वसूली, विभागीय आदेशों की अनदेखी और भ्रष्टाचार जैसे आरोप हैं। निदेशालय स्तर पर बड़ी संख्या में बीईओ के खिलाफ जांच लंबित है। जिलों में बीएसए के आदेशों के अनुपालन में लापरवाही और शिक्षकों के साथ कथित साठगांठ के मामले भी सामने आते रहे हैं। बावजूद इसके, कई मामलों में कार्रवाई में हो रही देरी विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।