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माघ मेले में उठा मुद्दा : रामचरित मानस संस्कृति का प्राण, इससे खिलवाड़ न करें

Fri, 03 Feb 2023 12:53 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 03 Feb 2023 12:53 AM IST
सार

माघ मेला के सेक्टर पांच स्थित आचार्यबाड़ा में बृहस्पतिवार को हुए संत सम्मेलन में रामचरित मानस को संतों ने सनातन संस्कृति का प्राण बताया। साधु-संतों ने एक स्वर सेकहा कि किसी को भी राम चरित मानस की प्रतियां जलाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

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Ramcharit Manas is the soul of culture, don't play with it
स्वामी प्रसाद मौर्य - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

माघ मेला के सेक्टर पांच स्थित आचार्यबाड़ा में बृहस्पतिवार को हुए संत सम्मेलन में रामचरित मानस को संतों ने सनातन संस्कृति का प्राण बताया। साधु-संतों ने एक स्वर सेकहा कि किसी को भी राम चरित मानस की प्रतियां जलाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। दोपहर दो बजे दीप प्रज्ज्वलन के साथ संत सम्मेलन आरंभ हुआ। अयोध्या के रामानुजाचार्य स्वामी विद्याभाष्कर ने कहा कि रामचरित मानस सनातनी संस्कृति का प्राण है। मानस की चौपाइयां मर्यादा और आदर्श की प्रतीक हैं।
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मानस की चौपाइयां सच्ची राह दिखाती हैं। ऐसे में अभद्र टिप्पणी करना और मानस की प्रतियों को जलाना अक्षम्य अपराध है। इस तरह का काम करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। इस दौरान संतों ने सनातनधर्मियों से एकजुट होने का आह्वान किया। ऋषिकेश के कृष्णाचार्य महाराज ने कहा कि राम चरित मानस का अपमान किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह सनातन संस्कृति पर बड़ा हमला है। इस तरह के कुचक्र को सख्ती से रोका जाना चाहिए। इस मौके पर कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य, अच्युत प्रपन्नाचार्य, स्वामी घनश्यामाचार्य, पुरुषोत्तमाचार्य समेत तमाम संत उपस्थित थे।
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स्वामी प्रसाद मौर्या है अज्ञानी: कथावाचक अशोक हरिवंश
माघ मेले में किन्नरों को कथा सुनाने आए छत्तीसगढ़ के कथावाचक डॉ. अशोक हरिवंश ने रामचरित मानस पर स्वामी प्रसाद मौर्या की टिप्पणी को निंदनीय बताते हुए कहा कि मौर्या के रामचरित मानस को ठीक से पढ़ने की जरूरत है। अगर वह रामचरित मानस का विरोध कर रहे है तो सबसे पहले अपना और परिवार के सदस्यों का नाम परिवर्तित करे। विवादित बयानबाजी से वह केवल पिछड़ों का वैट हथियाने की नाकाम कोशिश कर रहे है। सुप्रसिद्ध कथावाचक और छत्तीसगढ़ सरकार में कार्यरत रहे डॉ. अशोक हरिवंश ने कहा कि रामचरित मानस के हर कांड में किन्नरों का वर्णन किया गया है। लेकिन किन्नर समाज अलग थलग पड़ा है। मानस कथा के जरिए उन्हें जोड़ने का प्रयास कर रहें हैं।
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